सुल्तानपुर। जिले के माध्यमिक विद्यालयों में अब बच्चों को अपनी सुरक्षा की समझ भी दी जाएगी। इसके लिए सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग क्लब (एएचटीसी) गठित किए जाएंगे। इन क्लबों के माध्यम से छात्र-छात्राएं ''''बाल प्रहरी'''' की भूमिका निभाएंगे और अपने साथियों व परिवार को सतर्क करेंगे।
जिले में 29 राजकीय, 58 एडेड और 377 वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को क्लब गठन के आदेश जारी किए हैं। विद्यालयों को निर्धारित समय सीमा में समिति का विवरण, फोटोग्राफ और रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को उपलब्ध करानी होगी। सभी विद्यालयों की सूचना राज्य स्तरीय पोर्टल पर अपलोड की जाएगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक सूर्य प्रकाश सिंह ने बताया कि क्लब विद्यार्थियों को साइबर ठगी और फर्जी नौकरी के झांसे से बचाव सिखाएगा। इसमें विवाह के झांसे, बाल शोषण, बाल श्रम तथा अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान भी शामिल है। संदिग्ध घटना की सूचना पुलिस या संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाना सिखाया जाएगा। नियमित जागरूकता कार्यक्रम, कार्यशालाएं, संवाद और सुरक्षा गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
क्लब के अध्यक्ष होंगे प्रधानाचार्य प्रत्येक विद्यालय में प्रधानाचार्य क्लब के अध्यक्ष होंगे। एक वरिष्ठ शिक्षक समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। कक्षा 9 से 12 तक प्रत्येक कक्षा से एक छात्र और एक छात्रा सदस्य बनाए जाएंगे। यह क्लब पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) और विशेषज्ञों के सहयोग से काम करेगा। क्लब नियमित जागरूकता अभियान चलाएगा।
बरती जाएगी विशेष सतर्कता
एडीआईओएस जटाशंकर ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गृह मंत्रालय ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की है। इसके तहत रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, मॉल, सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी। स्कूलों को भी इस सुरक्षा तंत्र का सक्रिय भाग बनाया गया है। इससे बच्चों से जुड़े मामलों में समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।