सुल्तानपुर। जिले में घरेलू गैस सिलिंडरों की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सिलिंडर की किल्लत ने आम परिवारों के साथ ही छोटे कारोबारियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। इससे निपटने के लिए अब लोग मजबूरी में वैकल्पिक ईंधन का सहारा ढूंढने लगे हैं। इसके चलते चूल्हा जलाने वाली जलाऊ लकड़ी और कोयले की मांग अचानक बढ़ जाने से इनकी कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया जा रहा है।
इतना ही नहीं वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल होने वाला इंडक्शन भी दुकानों पर ढूंढे नहीं मिल रहा। दुकानदार इसके लिए मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। गैस किल्लत के कारण चाय-नाश्ते की दुकानों से लेकर घरों तक लोग लकड़ी या इलेक्ट्रिक चूल्हों का वैकल्पिक तौर पर इस्तेमाल करने लगे हैं।
इंडक्शन चूल्हों की कमी, दामों में 15 फीसदी तक बढ़ोतरी
बाजार में बड़ी कंपनियों के इंडक्शन और इंफ्रारेड चूल्हों की कमी हो गई है। थोक व्यापारियों के पास स्टॉक खत्म है। बचे उत्पाद महंगे दामों पर बिक रहे हैं। विक्रेता आशीष त्रिपाठी के अनुसार कंपनियों ने कीमतों में करीब 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की है, जिससे व्यापारी नया माल मंगाने से बच रहे हैं।
गैस की कमी से इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ी है। पहले 1600-2000 रुपये में मिलने वाले इंडक्शन अब करीब 500 रुपये महंगे हो गए हैं। व्यापारी विकेश कुमार के अनुसार दो हफ्ते से ऑर्डर के बावजूद सप्लाई नहीं आने के कारण ग्राहकों को परेशानी उठाना पड़ रही है।
जलाऊ लकड़ी पहुंची 700 के पार
कुड़वार। जलाऊ लकड़ी के दाम 500 रुपये से बढ़कर 700 रुपये तक पहुंच गए हैं। लकड़ी का कोयला 50 रुपये और पत्थर का कोयला 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। चाय विक्रेता राम सुमेर गुप्ता बताते हैं कि गैस न मिलने से लकड़ी पर काम करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है।
व विंदेश्वरीगंज क्षेत्र में भी लकड़ी के दाम में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। हरौरा बाजार में जो लकड़ी एक सप्ताह पहले 600 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह अब 780 रुपये तक पहुंच गई है। बहुरावां के कारोबारी जितेंद्र कुमार सिंह के अनुसार चाय-समोसा दुकानदार अब लकड़ी का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।