शहर के दरियापुर विद्युत उपकेंद्र पर विद्युत नियंत्रण के लिए लगाया गया कैपिसिटर बिना चालू हुए ही बंद हो गया। मजे की बात यह है कि इसका भुगतान भी कर दिया गया। भुगतान होने से कैपिसिटर के मद में पावर कॉर्पोरेशन का खर्च हुआ करीब 10 लाख रुपया डूब गया। सिस्टम नहीं चलने से लो व अधिक वोल्टेज की समस्या उपकेंद्र क्षेत्र में बनी हुई है और अधिकारियों को इस बात की जानकारी तक नहीं है।
शहर के दरियापुर समेत अन्य उपकेंद्रों पर लो व अधिक वोल्टेज की समस्या दूर करने के लिए पावर कैपिसिटर स्थापित करवाया गया था। करीब दो वर्ष पहले लगाया गया कैपिसिटर अन्य केंद्रों पर चालू हो गया लेकिन दरियापुर उपकेंद्र का आज तक नहीं चला। मजे की बात है कि दरियापुर उपकेंद्र का कैपिसिटर चालू नहीं हुआ और उसमें लगने वाले दो कैपिसिटर के खर्च का भुगतान कर दिया गया।
दोनों कैपिसिटर के खर्च पर करीब 10 लाख रुपये का भुगतान वितरण खंड ने कर दिया है। भुगतान के बाद इसे लगाने वाली कंपनी कुछ दिन चालू करने का आश्वासन देती रही लेकिन बाद में अधिकारियों समेत कंपनी ने इस पर चुप्पी साध ली। चालू नहीं होने से दरियापुर उपकेंद्र पर लगे दो कैपिसिटर के मद में खर्च हुआ करीब 10 लाख रुपया डूबने के कगार पर है। यही नहीं कैपिसिटर के नहीं चलने से दरियापुर उपकेंद्र क्षेत्र में बिजली की लो व अधिक वोल्टेज की समस्या बनी हुई है। मजे की बात यह है कि वितरण के अधिकारी समस्या से अनजान बने हैं।