सुल्तानपुर। जिले में धान की खेती के लिए पौध डाली जा रही है। बोआई हो रही है। किसानों को इस वक्त पानी की बेहद जरूरत है। बिना पानी के उनका काम नहीं चल रहा है, ऐसे में वे महंगे डीजल से सिंचाई करने को मजबूर हैं। किंतु सिंचाई विभाग का रोस्टर किसानों की यह मजबूरी समझ नहीं रहा है। ऐसे में जिले की नहरों में धूल उड़ रही है। अधिकारियों की मानें तो रोस्टर के अनुसार करीब 14 जून से जिले के किसानों को पानी मिल पाएगा। तब तक आधे से ज्यादा किसान पौध डाल चुके होंगे और उसके कुछ समय बाद ही मानसून भी आ जाएगा।
शारदा सहायक खंड के नोडल अफसर अधिशासी अभियंता शरद कुमार कहते हैं कि हर साल इसी तरह से होता है। आठ जून को लखीमपुर से पानी चला है। ढाई तीन सौ किलोमीटर पाने आने में समय लगता है। अभी बाराबंकी तक पानी नहीं पहुंचा है। उधर, जिला कृषि अधिकारी सदानंद चौधरी कहते हैं कि इस समय किसानों को पानी की बेहद जरूरत है। इस सवाल पर शरद कुमार कहते हैं कि यह कोई नई बात थोड़ी है, हर साल इसी सीजन में पानी दिया जाता है। इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है।
सूखने की कगार पर फसलें
कुड़वार। खेतों में इस समय चरी, उड़द व अन्य सब्जियों के साथ मक्का की फसलें सिंचाई के अभाव में सूखने के कगार पर हैं। किसान पानी के अभाव में धान की नर्सरी (बेरन ) समय से नहीं डाल पा रहे हैं। एसडीओ आशुतोष पांडेय ने बताया कि जल्द ही पानी आ जाएगा।
निजी नलकूप का सहारा लेने को विवश
भदैंया। क्षेत्र के नरहरपुर बभनगंवा नहर के किनारे के कई गांवों के किसान धान की नर्सरी तैयार करने के समय नहर में पानी नहीं आने से चिंतित हैं। नहर में पानी नहीं आने से किसानों ने बड़ी मुश्किल से निजी नलकूपों की मदद से पौंध (बेरन) डालने की तैयारी की है।
नहर में पानी नहीं आने से हुआ नुकसान
अखंडनगर। क्षेत्र के बेहराभारी के किसान वीरेंद्र वर्मा का कहना है कि उनकी दो बीघा मेंथा की फसल को सूखने से बचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था से सिंचाई में काफी खर्च आ गया। इससे उनका नुकसान हो गया है।
डबल नहर बनी दिखावा
मोतिगरपुर। इलाके के किसान धान की बेहन, पशुओं के हरे चारे वाली फसलों व जायद की फसलों की सिंचाई के लिए परेशान है। क्षेत्र की दोहरी नहर और माइनरों में उड़ती धूल इसकी कहानी स्वयं बयां कर रही है।