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नोटबंदी से कारोबार ठप, बाजार में सन्नाटा

Thu, 17 Nov 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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सुल्तानपुर के चौक में रेडीमेड कपड़े की दुकान में खाली बैठा दुकानदार। - फोटो : अमर उजाला
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500-1000 के पुराने नोट बंद होने के बाद शहर से लेकर कस्बों तक की बाजारों की रौनक गायब हो गई है। सहालग का मौसम भी बाजार को गति नहीं प्रदान कर पा रहा है। ऑटोमोबाइल होया इलेक्ट्रॉनिक्स, सराफा, कपड़ा, किराना समेत अन्य व्यवसाय तकरीबन ठप पड़े हैं। नोटबंदी के पहले की तुलना में खरीद-फरोख्त का औसत एक चौथाई पहुंच गया है।  
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शादी-विवाह के मौसम में आमतौर पर हर व्यापार में तेजी रहती है। नोटबंदी की वजह से बाजार को खासा नुकसान हुआ है। बड़े शोरूम संचालकों और छोटे व्यापारियों का धंधा ही चौपट हो गया है। हर साल शादी के मौसम में बाजार चढ़ जाता था। कपड़े, गहनों, बाइक, चार पहिया वाहन, टीवी, फ्रिज समेत अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामानों की खूब बिक्री होती थी।

500-1000 के नोट बंद होने की घोषणा के बाद व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर नौ नवंबर से इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आ रहे हैं। सभी व्यापारिक क्षेत्रों में बिक्री नाम मात्र की हो रही है। लोगों के पास देने के लिए नए नोट ही नहीं हैं। जिन्होंने पहले से खरीदारी का बजट बनाकर रखा था, अब वे पुराने नोटों को बदलने के लिए परेशान हैं। 
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नोट बंदी से राहत देने के लिए बैंक की ओर से व्यवसायियों को पॉस मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। यह जानकारी लीड बैंक के मैनेजर एसपी श्रीवास्तव ने दी। उन्होंने बताया कि जल्द ही आने वाले दिनों में बैंक में पॉस मशीन आ जाएगी। इससे  व्यवसायी बिना किसी शुल्क के बैंक में आवेदन कर पॉस मशीन ले सकेंगे। साथ ही साथ ग्राहक दुकान पर अपने एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर खरीदारी कर सकेंगे।

कपड़ा व्यापारी अमित तिवारी ने बताया कि शादी-विवाह के मौसम में होने वाली बिक्री नाममात्र की रह गई है। स्टाफ का खर्च निकालना मुश्किल होने लगा है। इलेक्ट्रॉनिक सामानों के विक्रेता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि पहले रोज 10 लाख के सामानों की सेल आसानी से हो जाती थी। ग्राहक सामानों एवज मेें चेक देना चाहते हैं जिसमें रिस्क है। 

गल्ला व्यापारी शंकर लाल कैलाशी बताते हैं कि आठ नवंबर के बाद से धंधे पर असर पड़ा है। दाल, चावल व अन्य अनाज की खरीद व बिक्री पर पहले की अपेक्षा कमी आई है। मोटर साइकिल विक्रेता दीपक जैन बताते हैं कि आम तौर पर प्रतिदिन 15 से 25 मोटर साइकिल की बिक्री होती थी। सरकार द्वारा नोट बंदी की वजह से अब तीन से पांच गाडिय़ां ही बमुश्किल बिकीं हैं।

 सराफा व्यापारी विनय बरनवाल ने बताया कि सहालग के समय गहनों की बिक्री औसतन एक लाख रुपये प्रतिदिन की थी। जो अब घटकर 20 से 25 हजार तक पहुंच गई है। सराफा व्यापार काफी मंदा हो गया है। चार पहिया वाहन विक्रेता सरदार देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि रूटीन खर्च पर नियंत्रण कर पाना संभव नहीं है। इस समय चार पहिया वाहनों की बुकिंग और बिक्री दोनों कम हो गई है।

प्रतिदिन कतार में लगने वाले किराए के ग्राहकों को बैंक से बाहर करने के लिए सरकार ने मंगलवार को रुपये बदलवाने पर अमिट स्याही लगाने की घोषणा की थी। घोषणा के बावजूद बुधवार को जिले की किसी भी बैंक में ग्राहकों की अंगुली पर अमिट स्याही नहीं लगाई गई। अभी स्याही जिले में पहुंची ही नहीं है।

चांदा कस्बे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया व बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में 500 व 1000 रुपये के नोट जमा करने और नई नोट की निकासी बुधवार को दिन भर हुई। एटीएम में पैसा नहीं होने से लोगों को धन निकासी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।  नोट बंदी के हफ्ता भर बाद भी ग्रामीण बैंक की शाखाएं धनाभाव के चलते अपने ग्राहकों को नए नोट नहीं दे पा रही हैं।

कस्बे में एसबीआई व बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा ने लगातार पुराने नोट जमा करने और नए नोट की निकासी का कार्य चल रहा है। एसबीआई के शाखा प्रबंधक रमेश यादव ने बताया कि लोगों की सुविधा को देखते हुए जमा निकासी का कार्य किया जा रहा है। एटीएम में भी रोजाना धनराशि लोड़ कराकर चलाने का प्रयास है। कुछ दिनों में स्थिति सामान्य हो जाएगी। 
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