दो दशक पूर्व वर्ष 2000 में हुए चुनाव के दौरान यहां सपा जीती थी। इसके बाद वर्ष 2006 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के बतौर प्रवीन अग्रवाल ने पहली बार जीत हासिल की। वर्ष 2012 में हुए चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर प्रवीन अग्रवाल पर भरोसा जता कर मैदान में उतारा। उन्होंने भी लगातार दूसरी बार अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर पार्टी के विश्वास को कायम रखा।
वर्ष 2017 में पार्टी ने प्रवीन अग्रवाल का टिकट काटकर बबिता जायसवाल को मैदान में उतारा। बबिता ने भी जीत हासिल कर अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा कायम बनाए रखा। वर्ष 2017 में पार्टी से प्रत्याशी नहीं बनाए जाने से प्रवीन अग्रवाल जीत की हैट्रिक लगाने से दूर रह गए। इस बार पार्टी ने उन पर फिर भरोसा जताते हुए चुनाव मैदान में उतारा तो प्रवीन अग्रवाल ने रिकॉर्ड मतों से तीसरी बार अध्यक्ष पद पर काबिज होकर इतिहास रच दिया।