सुल्तानपुर। स्ववित्त पोषित संस्थान में पढ़ाने से इंकार करने पर केएनआई पीएसएस के अंग्रेजी विभाग के रीडर को बंधक बनाकर पिटाई करने के मामले में आरोपी केएनआई पीएसएस के प्रबंधक व भाजपा विधायक विनोद सिंह और उनके भाई ने बुधवार को कोर्ट में सरेंडर कर दिया। एमपी-एमएलए की विशेष अदालत के मजिस्ट्रेट योगेश कुमार यादव ने विधायक व उनके भाई को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 26 सितंबर की तिथि नियत की है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय के मुताबिक 11 अक्तूबर 2004 को केएनआई पीएसएस के अंग्रेजी विभाग के रीडर विजय प्रताप सिंह ने कॉलेज के प्रबंधक व मौजूदा समय में सुल्तानपुर क्षेत्र के भाजपा विधायक विनोद सिंह और उनके भाई अरविंद सिंह के खिलाफ कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज कराया था।
विजय प्रताप सिंह का आरोप है कि केएनआई पीएसएस के प्रबंधक विनोद सिंह एक स्ववित्त पोषित संस्थान में बीफार्मा में अंग्रेजी पढ़ाने के लिए उन पर दबाव बना रहे थे। 11 अक्तूबर 2004 की शाम करीब पांच बजे प्रबंधक विनोद सिंह ने रीडर विजय प्रताप सिंह को लाल डिग्गी स्थित केएनआईसीई में बुलाया था। वहां पहुंचने पर रीडर पर अंग्रेजी पढ़ाने के लिए प्रबंधक दोबारा दबाव बनाने लगे थे।
आरोप है कि पढ़ाने से इंकार करने पर प्रबंधक व उनके भाई ने रीडर विजय प्रताप सिंह को गाली व धमकी देते हुए कमरे में बंधक बनाकर पिटाई कर दी थी। 23 अक्तूबर 2004 को पुलिस ने विवेचना पूरी कर प्रबंधक व उनके भाई के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
इसी मामले में बुधवार को प्रबंधक व भाजपा विधायक विनोद सिंह और उनके भाई अरविंद सिंह ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उनके अधिवक्ता संतोष पांडेय ने जमानत अर्जी पर कहा कि फर्जी केस दर्ज किया गया है। जमानत अर्जी का सरकारी वकील वैभव पांडेय व कालिका प्रसाद मिश्र ने विरोध किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद प्रबंधक व भाजपा विधायक विनोद सिंह और उनके भाई को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।