सुल्तापुर। धोखाधड़ी के मामले में आरोपी भाजपा नेता व को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्र ने वारंट जारी होने पर शुक्रवार को सीजेएम नवनीत सिंह की कोर्ट में समर्पण कर दिया। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी वारंट निरस्त कर आरोप तय किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 30 मई को होगी।
को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व चेयरमैन विजय मिश्र, कोतवाली नगर के सिविल लाइन निवासी मुन्ना जायसवाल व अधिवक्ता कौशलेंद्र प्रताप मिश्र के खिलाफ वर्ष 2007 में धोखाधड़ी से बैनामा करने का मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। लंभुआ के धरियामऊ निवासी संतराम तिवारी ने यह मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि विजय मिश्र ने भूमि विक्रय का इकरारनामा संतराम से किया था। बाद में 12 सितंबर 2007 को उनके स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर फर्जी हस्ताक्षर बनाकर और फोटो लगाकर इकरारनामे की भूमि को मुन्ना जायसवाल की पत्नी मीरा देवी को बेच दिया था।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज केस में 18 साल बाद भी आरोप तय नहीं हो सका था। विजय मिश्र के हाजिर नहीं होने पर शुक्रवार को कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी कर दिया। इसकी सूचना मिलने पर वे कोर्ट में हाजिर हो गए। काफी देर तक कस्टडी में रहने के बाद कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी वारंट निरस्त कर दिया और आरोप तय किया है।