-दूबेपुर क्षेत्र के एक कच्चे घर में निकला सांप।-स्रोत ग्रामीण
सुल्तानपुर। सुल्तानपुर। उमस भरी गर्मी के कारण सांप बिलों से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। इससे सर्पदंश के मामलों में वृद्धि हुई है। मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लगातार मरीज आ रहे हैं।
एक अप्रैल से अब तक 28 लोगों को 130 एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) लगाई जा चुकी है। पिछले वर्ष 28 लोगों की सर्पदंश से मौत हुई थी। इस वर्ष जनवरी से अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार मई-जून में बिलों का तापमान बढ़ने से सांप बाहर आते हैं। जून से अक्तूबर उनका प्रजनन काल होता है, जिससे वे अधिक सक्रिय रहते हैं। भोजन और साथी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि झाड़-फूंक के बजाय समय पर एएसवी से जान बचाई जा सकती है।
एएसवी की उपलब्धता
मुख्य चिकित्सा अधिकारी भारत भूषण ने बताया कि जिले में एएसवी की कोई कमी नहीं है। सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन उपलब्ध है। स्वास्थ्य विभाग के पास 3110 से अधिक एएसवी वायल का भंडार है। मेडिकल कॉलेज में करीब 700 वायल का भंडार है। आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी दीपक मिश्र ने बताया कि गंभीर सर्पदंश में 10 एएसवी तक देनी पड़ सकती है।
तीन जहरीली प्रजातियां सबसे खतरनाक व बचाव
प्रभागीय वनाधिकारी अमित सिंह के अनुसार जिले में कोबरा, करैत और रसेल वाइपर प्रमुख जहरीले सांप हैं। कोबरा और करैत का जहर तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है, जिससे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। वाइपर का जहर रक्त नलिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जिससे रक्तस्राव और किडनी पर असर पड़ सकता है। सर्पदंश के लक्षणों में पलकें भारी होना, आवाज में लड़खड़ाहट और सांस लेने में कठिनाई शामिल है। पीड़ित को तुरंत अस्पताल ले जाएं, उसे घबराने न दें और काटे गए हिस्से को स्थिर रखें।