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बरौलिया में खुशियां, बांटी मिठाई

Sun, 20 Sep 2015 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सुल्तानपुर
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केंद्रीय रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की ओर से बरौलिया गांव अंगीकृत किए जाने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। रविवार को ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी। ग्रामीणों को भरोसा है कि अब उनके गांव की तस्वीर बदल जाएगी। बरौलिया गांव का राजनीतिक अतीत अमेठी से चुनाव लड़ने आए संजय गांधी के जमाने से ही अलग रहा है। यहां के ग्रामीणों का दावा है कि कभी भी उनके गांव के बूथ से कांग्रेस को जीत नहीं मिली है।
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संजय गांधी के बाद राजीव गांधी, सोनिया गांधी और अब राहुल गांधी के कार्यकाल में भी ग्रामीण यहां से कांग्रेस की शिकस्त का दावा करते हैं। बरौलिया गांव विकास से कोसों दूर है। गांव को जाने के लिए क्षतिग्रस्त सड़क, एकमात्र प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल ही स्कूल है। उच्च शिक्षा के लिए गांव के बच्चों को आज भी 15 किलोमीटर दूर इन्हीं क्षतिग्रस्त राहों से होकर जाना पड़ता है।

गांव के बच्चे व बुजुर्ग आज भी तालाबों में कपड़े धोने व नहाने को मजबूर हैं। बच्चे खुद के साथ-साथ जानवरों को भी इसी तालाब में नहलाते हैं। गांव को विद्युत, सिंचाई, शुद्ध पेयजल आदि की दरकार है। 19 मई 2014 को गांव में भीषण आग की चपेट में आने से बरौलिया के 72 घर जल गए थे। अग्निपीड़ितों की दशा आज तक वैसी ही बनी है। हालांकि तब स्मृति ईरानी ने अग्नि पीड़ितों को राहत सामग्री भेजी थी।
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 केंद्रीय रक्षामंत्री मनोहर परिकर की ओर से गांव को गोद लिए जाने से ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। रविवार को गांव में जमकर मिठाइयां बांटी गईं। लोगों को भरोसा है कि अब उनके गांव की समस्याएं दूर हो जाएंगी। गांव के रामदेव, नरसिंह बहादुर सिंह, प्रधान सूरसती देवी, रामसिंह, नरेंद्र बहादुर सिंह, देवी प्रसाद, धीरेंद्र प्रताप सिंह, शिवलाल, रामप्रकाश, रामकुमार, श्यामबहादुर, रामयज्ञ आदि लोग खुशी का इजहार करते हुए एक दूसरे को मिठाई खिलाई।
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