नोटबंदी के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों की बैंक शाखाओं में शुरू हुई कैश की किल्लत दूर नहीं हो पा रही है। सीमित करेंसी चेस्ट मिलने से खाताधारकों को उनकी जरूरत के मुताबिक भुगतान नहीं दिया जा रहा है। बुधवार को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बैंक शाखाओं मे कैश की समस्या रही। खाताधारकों को बिना कैश के लौटना पड़ा।
जिले में कुल 196 बैंक शाखाओं का संचालन हो रहा है। नोटबंदी के बाद 51 दिनों में शहरी क्षेत्र की बैंक शाखाओं के हालात कुछ हद तक भले ही सुधरे हों लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बैंक शाखाओं में कैश की किल्लत बरकरार है। बैंक शाखाओं में करेंसी चेस्ट खाताधारकों की जरूरत के मुताबिक नहीं पहुंच पा रहा है। जिले के कुल 196 बैंक शाखाओं में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की 80 शाखाएं हैं। इसमें 75 शाखाएं ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं।
एसबीआई की ग्रामीण क्षेत्रों में 12 शाखाएं संचालित हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की 28 शाखाओं का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा है। इनमें अधिकांश शाखाओं में बुधवार को जरूरत के अनुरूप कैश नहीं मिला। इस वजह से लोगों को सीमित भुगतान देकर काम चलाया गया। ग्रामीण क्षेत्र के खाताधारकों ने बताया कि उन्हें सिर्फ एक या दो हजार रुपये का ही भुगतान एक दिन में मिल पाता है। बुधवार को ग्रामीण बैंक की गोसाईगंज शाखा में खाताधारकों को एक से दो हजार रुपये तक का अधिकतम भुगतान किया गया।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बरौंसा स्थित जयसिंहपुर शाखा में कैश नहीं रहा। इस वजह से बैंक अधिकारियों ने शाखा का गेट बंद करवा दिया। खाताधारकों को दिनभर भुगतान नहीं दिया जा सका। यही हाल अन्य स्थानों पर स्थित बैंक शाखाओं का रहा। ग्रामीण बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि भुगतान को लेकर दबाव अधिक है, करेंसी चेस्ट जरूरत के सापेक्ष आधा मिल रहा है। भीड़ को देखते हुए एक ब्रांच पर भुगतान के लिए कम से कम 12 से 15 लाख रुपये करेंसी चेस्ट दिया जाना चाहिए जबकि मात्र पांच से छह लाख रुपये ही दिया जा रहा है। इस वजह से ग्रामीण बैंक की शाखाओं पर कैश की समस्या बरकरार है।