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विजेथुआ धाम में स्वयंभू हैं बजरंगबली : जगद्गुरु रामभद्राचार्य

Sat, 26 Oct 2024 02:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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जगदुगुरु रामभ्ाद्राचार्य
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सूरापुर (सुल्तानपुर)। तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि विजेथुआ धाम में बजरंगबली स्वयंभू है। इनकी स्थापना नहीं हुई है। वह शुक्रवार को सूरापुर स्थित पौराणिक विजेथुआ धाम में शुरू हुए विजेथुआ महोत्सव के पहले दिन की कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यहां बजरंगबली ने मकराक्षी का उद्धार किया और कालनेमि का संहार किया।
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उन्होंने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म को पहचानने के लिए प्रेरित करते हुए बताया कि कालिनेमि ने बगीचा बनाया, धोती पहनी और पाखंड किया, लेकिन हनुमान जी ने उसके पाखंड को समझ लिया। पहचान गए कि वह राक्षस है। इसके बाद उसे अपनी पूंछ में लपेट कर पटक दिया। इससे उसकी मृत्यु हो गई।
जगतगुरु के मुख से यह प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इसके पहले जगतगुरु के विजेथुआ आगमन के समय ढकवा में महोत्सव के संयोजक विवेक तिवारी ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया। दोपहर तीन बजे कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं विजेथुआ धाम पहुंचीं। यहां श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।
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हिंदू जैसा सहिष्णु और कोई हो नहीं सकता

सुल्तनापुर। विजेथुआ महोत्सव में श्रीमद्भागवत कथा का पाठ करने आए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पांच अपेक्षाएं हैं। इसमें हिंदू मंदिरों से सरकार का अधिग्रहण हट जाए, गंगा-जमुना की धारा अविरल बहती रहे, हिंदी राष्ट्र भाषा बन जाए, राम चरित मानस राष्ट्र ग्रंथ बन जाए और पाक अधिग्रहीत कश्मीर भारत में शामिल हो जाए तो सारी अपेक्षाएं पूरी हो जाएंगी। वह विजेथुआ महोत्सव के आयोजक विवेक तिवारी के आवास विजेथुआ राजापुर में मीडिया से मुखातिब थे।


राजनीतिक दलों की ओर से हिंदू और मुस्लिम धर्म को लेकर हो रही बयानबाजी पर जगतगुरु ने कहा कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि हिंदुत्व भारतीयता का पर्यायवाची है। इस सत्य को हर धर्म के व्यक्ति को स्वीकार कर लेना चाहिए। बहराइच की घटना का उल्लेख किए बिना उन्होंने कहा कि सभी को दूसरों की आस्था का सम्मान करना होगा। मथुरा वृंदावन पर उन्होंने कहा कि जैसे मेरी गवाही ने रामजन्म भूमि की दिशा बदली थी, वैसे इसकी भी दिशा बदलेगी।
धर्मावलंबियों में द्वेष की भावना बढ़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा है नहीं। हिंदू जैसा सहिष्णु कोई हो नहीं सकता। इस समय हमारी सहनशीलता की अग्नि परीक्षा हो रही है। सनातन धर्म पर हो रही टिप्पणियों को लेकर उन्होंने कहा कि वास्तव में सनातन धर्म ही वैदिक धर्म है। विजेथुआ महावीरन को रामायण सर्किट में जोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रयास करूंगा।
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