सुल्तानपुर। कठिन मेहनत और ईमानदारी का कोई शॉर्टकट नहीं है। इस बात को बदरुल निशा ने सच कर दिखाया है।
मत्स्य पालन व्यावसाय से जुड़कर न सिर्फ उन्होंने अपनी किस्मत चमकाई है, बल्कि उनके इस व्यावसाय से कई युवाओं को भी रोजगार दिया है। इनके तालाब की मछलियां कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़ समेत कई जिलों में बिकने के लिए जाती हैं। दूबेपुर के कचनावां गांव निवासी बदरुल निशा ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत उन्होंने 2022-23 में मत्स्य विभाग में आवेदन किया था।
20.90 लाख रुपये के प्रोजेक्ट से मछली पालन का व्यावसाय शुरू किया था। इसमें उन्हें 12.54 लाख रुपये का मत्स्य विभाग से अनुदान मिला था। बदरुल को 8.36 लाख रुपये खर्च करना पड़ा था।
इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जिले भर में बदरुल का सबसे बड़ा 1.90 हेक्टेयर में मछली पालन का जलाशय है। इनके तालाब से हर तीसरे माह 40 क्विंटल मछली का उत्पादन होता है। इनके तालाब की मछलियां कौशांबी, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, जौनपुर और अमेठी में बिकने के लिए जाती हैं।