मेडिकल कॉलेज में दवा लेने के लिए काउंटर पर मरीजाें व तीमारदारों की भीड़।-संवाद
सुल्तानपुर। ठंड का असर अब सेहत पर भारी पड़ने लगा है। सर्दी बढ़ते जिले में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में दो गुना तक इजाफा हो गया है। हालात यह हैं कि गर्मी के मौसम में पूरे माह औसतन पांच से 10 मरीज ही सामने आते थे, वहीं अब हर दिन एक से दो ब्रेन स्ट्रोक के रोगी अस्पताल पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, अधिकतर मामलों में अनियंत्रित ब्लड प्रेशर इसकी बड़ी वजह बन रहा है। मेडिकल कॉलेज के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आरए वर्मा ने बताया कि सर्दियों में रक्तचाप अचानक बढ़ने का खतरा रहता है। विशेष रूप से 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में तेजी देखी रहती है। यदि पहले से हाई बीपी, शुगर या हृदय रोग की समस्या है तो जोखिम और बढ़ जाता है।
ठंडे पानी से नहाने से बचें
डॉ. आरए वर्मा ने सलाह देते हुए बताया कि सर्दियों में अपनी दिनचर्या और दवाओं को लेकर लापरवाही न बरतें। बीपी की नियमित जांच कराएं और चिकित्सक की सलाह के बिना दवा में कोई बदलाव न करें। ठंडे पानी से नहाने, सुबह-सुबह तेज ठंड में बाहर निकलने से भी बचने की जरूरत है। जिन मरीजों का ब्लड प्रेशर दवा से नियंत्रित है, उन्हें दवा बिल्कुल नहीं छोड़नी चाहिए। दवा छोड़ते ही बीपी अचानक बढ़ सकता है।
लक्षण दिखें तो गोल्डन ऑवर न गंवाएं
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. आरके मिश्रा ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक में शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डन ऑवर बेहद अहम होता है। सीने में भारीपन, अचानक पसीना आना, बोलने में लड़खड़ाहट, चेहरे का तिरछा होना या शरीर के एक हिस्से में कमजोरी महसूस हो तो इसे सामान्य ठंड समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में पहुंचें। समय पर इलाज से जान के साथ-साथ भविष्य की अपंगता से भी बचा जा सकता है।