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Sultanpur News: आठ साल का इंतजार, आज फैसले पर टिकीं विवेक के परिवार की निगाहें

Thu, 17 Sep 2026 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर
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 परिवार के साथ विवेक तिवारी (फाइल फोटो)। स्रोत- सोशल मीडिया
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सुल्तानपुर। आठ साल पहले की वह रात आज भी विवेक तिवारी के परिवार के लिए एक टीस बनकर जिंदा है। 29 सितंबर 2018 की भोर में लखनऊ में एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक की गोली लगने से मौत की खबर ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया था।
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बृहस्पतिवार को बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय का फैसला आने की उम्मीद के बीच पैतृक गांव बल्दीराय के सरैया माफी से लेकर शहर तक एक बार चर्चा फिर है। परिजनों और करीबियों की निगाहें फैसले पर टिकी हैं। घटना को याद कर लोगों में पुलिसकर्मियों के प्रति नाराजगी है।
सरैया माफी निवासी बैंक मैनेजर धर्मराज तिवारी के तीन बेटों में विवेक दूसरे नंबर के थे। शुरुआती पढ़ाई जिले में करने के बाद उन्होंने मेरठ से एमबीए किया और गुरुग्राम में नौकरी शुरू की। एपल कंपनी में एरिया सेल्स मैनेजर (नॉर्थ) के पद पर लखनऊ में तैनात हुए। शादी के बाद पत्नी कल्पना और बेटियों प्रियांशी व शानू के साथ लखनऊ में रहने लगे।
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विवेक की मौत ने मन में छोड़ी गहरी टीस
विवेक के बचपन के दोस्त करौंदिया निवासी आनंद दुबे बताते हैं कि उन्हें क्रिकेट खेलने का बेहद शौक था। दोस्तों के साथ अक्सर क्रिकेट खेलने निकल जाते थे। आनंद के मुताबिक विवेक काफी मिलनसार थे। उनकी असमय मौत ने आज भी करीबियों के मन में गहरी कसक छोड़ रखी है। विवेक की पत्नी कल्पना ने बेटियों और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच मामले की पैरवी जारी रखी। आठ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसले की घड़ी करीब है। परिजनों का कहना है कि न्यायालय के फैसले से उन्हें न्याय की उम्मीद है। उनका मानना है कि निर्दोष विवेक की जान लेने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
इनसेट : यह है पूरा मामला
28/29 सितंबर 2018 की रात एपल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी अपनी पूर्व सहकर्मी सना के साथ गोमतीनगर विस्तार स्थित सरयू अपार्टमेंट के पास एसयूवी में बैठे थे। तभी बाइक सवार सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार वहां पहुंचे। पुलिस के मुताबिक कार रोकने की कोशिश के दौरान विवाद हुआ। आरोप है कि सिपाही प्रशांत चौधरी ने गोली चलाई। गोली कार की विंडस्क्रीन तोड़ते हुए विवेक की ठोड़ी में लगी। कार अंडरपास के खंभे से टकरा गई। पुलिसकर्मी विवेक को लोहिया अस्पताल ले गए, जहां उनकी मौत हो गई। पूर्व सहकर्मी की तहरीर पर गोमतीनगर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज हुई। दोनों सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और बाद में बर्खास्त कर दिया गया। एसआईटी की जांच में प्रशांत चौधरी को हत्या और संदीप कुमार को मारपीट का आरोपी बनाया गया।
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