सुल्तानपुर। आजकल गांवों में खड़ंजे उखाड़कर रंग-बिरंगी टाइल्स लगाई जा रही हैं। सीमेंटेड रोड और नालियों का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन शहर का पूर्वी छोर नारायनपुर वार्ड के अलहदादपुर विकास कार्य में पीछे छूट गया है। यहां कीचड़ से भरीं कच्ची सड़कें, बहती हुईं कच्ची नालियां दिखेंगी, यहां की स्थिति गांवों से भी ज्यादा खराब है। हजारों टन ऊंचा पहाड़ सरीखा शहर का कचरा लोगों का जीना मुहाल किए हुए है।
अलहदाद पुर में करीब दो हजार लोगों की आबादी रहती है। यहां की दुर्दशा की सबसे बड़ी वजह शहर का सीमा विस्तार न होना है। विस्तार हुआ होता तो अब तक यह हिस्सा शहर के मध्य में आ जाता। ऐसे में यहां सड़कें, नालियां आदि बनवाना जनप्रतिनिधियों की मजबूरी बन जाती। 40 साल से डंप हो रहे हजारों टन के कचरे को भी यहां से शिफ्ट करना पड़ता। लेकिन न शहर का विस्तार हुआ और न ही किसी नेता व अफसर ने यहां आकर हालचाल जाने की जहमत उठाई।
यहां रोज 27 टन से ज्यादा कचरा फेंका जाता है। जिससे आसपास इतनी ज्यादा दुर्गंध रहती है कि लोग डंपिंग ग्राउंड की तरफ की अपने घर की खिड़की नहीं खोलते। लोग बताते हैं कि कई बार खाना खाते समय दुर्गंध से उबकाई आ जाती है। अलहदादपुर में बीते 10 वर्ष में आबादी क्षेत्र भी बढ़ा है। इस समय यहां पर करीब 200 से ज्यादा आवासीय भवन, 100 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान, तीन अस्पताल, इंटर कॉलेज समेत अन्य शिक्षण संस्थान हैं।
अलहदादपुर में लोगों का रहना दुश्वार हो गया है। जिन लोगों ने मकान बनवाए हैं वे उसे किराए पर देकर खुद दूसरी जगह किराए पर रहने को मजबूर हैं।
सीमा विस्तार न होने से पिछड़ा
हम लोग अपने घर को शहर जैसा नहीं बता पाते हैं। यह क्षेत्र नगर पालिका के सीमा विस्तार के बिना पिछड़ा ही रहेगा। इसके लिए ठोस पहल करने की जरूरत है।
- अरुण कुमार मिश्र
-
कचरे से जीना मुहाल
नगर पालिका का सीमा विस्तार हो जाता तो अलहदादपुर से कचरा डंपिंंग ग्राउंड को कहीं दूर स्थापित हो जाता। कई टन कचरा खुले में पड़ा है, इसकी दुर्गंध से जीना मुहाल है।
-डॉ. प्रमोद पांडेय
समस्या का हो निस्तारण
शहर का सीमा विस्तार कर यहां से कचरा डंपिंग ग्राउंंड शिफ्ट करने के लिए जनप्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए। हम लोगों की समस्या का निराकरण होना जरूरी है।
- अजय सोनी
सालों से झेल रहे समस्या
नगर पालिका का दायरा नहीं बढ़ने से यहां के हालात काफी बदतर हैं। हम लोग अर्से से इस समस्या को झेल रहे हैं। इससे हम लोग बुरी तरह से प्रभावित हैं।
- कुसुमा देवी।
सीमा विस्तार हो तो डंपिंग ग्राउंड करें शिफ्ट
अलहदादपुर में डंंपिंग ग्राउंंड पर जमा कचरे का निस्तारण करना हमारी प्राथमिकता है। प्रयास है कि चार-पांच महीने में यहां के कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण कर दिया जाय। हालांकि, सीमा विस्तार हो जाय तो यह सबके लिए बेहतर रहेगा। इससे डंंपिंग ग्राउंड को आबादी क्षेत्र से दूर शिफ्ट किया जा सकेगा।
- प्रवीन अग्रवाल, पालिकाध्यक्ष।