सुल्तानपुर। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा दो तक के बच्चों को निपुण बनाने की तैयारी है। निपुण विद्यालयों का मूल्यांकन साल में दो बार डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षुओं से कराया जाएगा। कमजोर बच्चों को पढ़ाई की मुख्य धारा में लाने के लिए शिक्षक और अधिक प्रयास करेंगे।
विद्यार्थी पढ़ने, समझने और गणना करने में दक्ष बन सकेंगे। इसके साथ अभिभावकों से संवाद बढ़ाते हुए व्यवाहरिक कठिनाइयों को शिक्षक समझेंगे और उसका निवारण करेंगेे।
जिले में 1453 प्राथमिक विद्यालय हैं। यहां पर अध्ययनरत कक्षा दो तक बच्चो को निपुण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। निपुण विद्यालयों का मूल्यांकन दिसंबर और फरवरी माह में कराने की तैयारी चल रही है। विद्यालयों में पाठ्यपुस्तक के साथ वर्क बुक, मैथ्स चार्ट और भाषा किट का उपयोग करते हुए छात्र-छात्राओं में तर्क, अनुमान की क्षमता को विकसित किया जाएगा।
बीएसए उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को ‘निपुण विद्यालय’ के रूप में विकसित करने के लिए वार्षिक लक्ष्य तय कर दिए गए हैं। प्रत्येक स्कूल में न्यूनतम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। कक्षा और विषयवार पाठ्यक्रम को हर माह पूरा करना होगा।
खंड शिक्षा अधिकारी, डायट मेंटर्स, एसआरजी (राज्य संसाधन समूह), एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) और शिक्षक संकुल को इसकी पूरी जिम्मेदारी दी गई है। हर खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 21 स्कूलों को ‘निपुण विद्यालय’ के रूप में विकसित करेंगे।
लर्निंग एट होम को दिया जाएगा बढ़ावा
बीएसए उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि शिक्षकों को प्रशिक्षण के अनुसार शिक्षण पद्धतियों को कक्षा में अपनाने, छात्रों की प्रगति का सतत आंकलन करने और रेमेडियल क्लासेस चलाने की जिम्मेदारी दी गई है। लर्निंग एट होम को बढ़ावा देने के लिए अभिभावकों से संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर महीने के चौथे शनिवार को प्रधानाध्यापकों के साथ समीक्षा बैठक करें।