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रामजन्मभूमि आंदोलन में भाग न लेने वाले को बना दिया मंदिर का मुख्य कर्ताधर्ता : रामभद्राचार्य

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विजेथुआ धाम में आयोजित वाल्मीकि रामायण की कथा सुनाते स्वामी रामभद्राचार्य महाराज।
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सूरापुर (सुल्तानपुर)। विजेथुआ महावीरन धाम में चल रहे विजेथुआ महोत्सव में वाल्मीकि रामायण सुना रहे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि अजीब विडंबना है कि जिन्होंने एक बार भी राम जन्मभूमि आंदोलन में भाग नहीं लिया, उन्हें ही मंदिर का मुख्य कर्ताधर्ता बना दिया गया। उन्होंने संतों का महात्म्य बताते हुए कहा कि जब से संतों ने गांव में जाना छोड़ दिया तब से विसंगतियां बढ़ गई हैं।
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रामभद्राचार्य महाराज ने आगे कहा कि अवध और अवधी दोनों मुझे बहुत भाती हैं। यह मेरी और मेरे आराध्य की जन्मभूमि है। सभी सनातनियों को मस्तक पर तिलक जरूर लगाना चाहिए। तिलक लगाने के अनेक फायदे हैं। तिलक के बिना ब्राह्मण यमराज जैसा दिखता है। एक सूक्ति में बताया कि तांबुल के बिना राजा, तिलक के बिना ब्राह्मण, व्याकरण के बिना वाणी और नमक के बिना भोजन अच्छा नहीं लगता। श्रद्धालुओं को बताया कि विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ के पास गए। राजा से उनके पुत्रों को मांगा। दशरथ ने कहा मैं राम को नहीं दे सकता। फिर वशिष्ठ के समझाने के बाद दशरथ ने राम को विश्वामित्र के साथ विदा किया। विश्वामित्र ने राम को विद्या प्रदान की। राम ने सबसे पहला वध ताड़का का किया था। आयोजक विवेक तिवारी ने व्यास पीठ का पूजन किया। इस मौके पर राकेश तिवारी, विधायक राजेश कुमार गौतम, विधान परिषद सदस्य शैलेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. सीताशरण त्रिपाठी, रामार्य पाठक, हाईकोर्ट अधिवक्ता राजेश तिवारी, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह रवि, डॉ. सुरेंद्र प्रताप तिवारी, रितेश दुबे समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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