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पुराने बीएसए कार्यालय में चलेगा दीवानी न्यायालय

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गौरीगंज। जिले का पुनर्गठन होने के नौ साल बाद जिला मुख्यालय पर दीवानी न्यायालय संचालित होने की उम्मीद बढ़ गई है। अपना भवन नहीं होने की स्थिति में शासन ने जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर पुराने बीएसए कार्यालय भवन में अस्थाई संचालन की अनुमति प्रदान कर दी है।
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दीवानी कोर्ट संचालित होने से न्यायिक कार्य के लिए अमेठी के लोगों को दूसरे जिलों की दौड़ लगाने से छुटकारा मिल सकेगा।
सुल्तानपुर की अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना तथा रायबरेली जिले की तिलोई व सलोन तहसील को अलग कर तत्कालीन बसपा सरकार ने एक जुलाई 2010 को छत्रपति शाहूजी महराज नगर के नाम से जिले का पुनर्गठन किया था।
हालांकि बाद में सूबे की सत्ता संभालने वाली सपा सरकार ने सलोन को दोबारा रायबरेली में शामिल करने के साथ ही जिले का नाम अमेठी कर दिया था। जिले का पुनर्गठन होने के बाद से ही जिला मुख्यालय पर दीवानी न्यायालय संचालन की प्रक्रिया शुरू हुई थी।
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जिले की अमेठी, गौरीगंज व मुसाफिरखाना तहसील के लोगों को न्यायिक कार्य के लिए सुल्तानपुर व तिलोई तहसील के लोगों को रायबरेली की दौड़ नहीं लगानी पड़े इस दिशा में प्रयासरत जिला प्रशासन ने वर्ष 2011 में कटरा लालगंज के पुराने उच्च प्राथमिक स्कूल भवन में संचालित बीएसए कार्यालय में अस्थाई दीवानी न्यायालय संचालित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
तब से लेकर अब तक यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। मौजूदा डीएम प्रशांत शर्मा के प्रयास से शासन ने जिला प्रशासन के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। इतना ही नहीं शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग के अनुभाग-1 के अनुसचिव उमेश कुमार तिवारी ने इस संबंध में लिखित पत्र भी जारी कर दिया है।
शासन के विशेष सचिव व बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसचिव की ओर से जारी पत्र मिलने के बाद जल्द न्यायालय संचालन की उम्मीद बढ़ गई है। दीवानी कोर्ट संचालित होने से न्यायिक कार्य के लिए अमेठी के लोगों को दूसरे जिलों की दौड़ लगाने से छुटकारा मिल सकेगा।
शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने बीएसए कार्यालय भवन में दीवानी न्यायालय संचालित करने की सशर्त अनुमति दी है। विभाग ने कहा है कि बीएसए कार्यालय भवन में न्यायालय संचालन की अनुमति सिर्फ दो साल के लिए दी जा रही है। दो वर्ष पूरे होते ही दीवानी न्यायालय को यह भवन खाली कर बेसिक शिक्षा विभाग को वापस करना होगा।
बीएसए कार्यालय भवन में अस्थाई न्यायालय संचालित करने की अनुमति शासन ने भले ही सप्ताह भर पहले दी हो लेकिन जलिंा प्रशासन उसे 10 माह पहले ही खाली करवा चुका है। मौजूदा समय बीएसए दफ्तर के कुछ पटल शहर स्थित गौरीगंज बीआरसी तो शेष डीआईओएस कार्यालय भवन में चल रहे हैं।
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