सुल्तानपुर। जिले में मनरेगा में हुए घोटाले के मामले में हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने मनरेगा के तहत हुए करीब चार वर्ष के कार्यों व खरीद-फरोख्त का विवरण मांगा है। चार वर्षों के दौरान जिले में मनरेगा से खर्च हुए करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये का विवरण अधिकारियों को सील कर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। सीबीआई के पत्र के बाद घोटाले से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों में खलबली मची है।
बीते दिनों हाईकोर्ट की ओर से सूबे के सभी जिलों में मनरेगा के तहत चार वर्षों में कराए गए कार्यों एवं खरीद- फरोख्त की जांच के निर्देश सीबीआई को देने के बाद प्रकरण गरमा गया है। न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने घोटाले पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सीबीआई ने पत्र भेजकर चार वर्षों के दौरान मनरेगा से हुई खरीद-फरोख्त व कराए गए कार्यों का विवरण मांगा है। पत्र में सीबीआई ने इस दौरान खर्च की गई धनराशि का विवरण सील कर उपलब्ध कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। सूत्रों के मुताबिक जिले में चार वर्षों के दौरान मनरेगा से खर्च किए गए करीब 150 करोड़ रुपये में व्यापक अनियमितता बरती गई थी। सामानों की खरीद के साथ ही मजदूरों के नाम पर मजदूरी का जमकर फर्जी भुगतान हुआ है। हालांकि अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जिले में मनरेगा के बड़े घोटालों को दबा लिया। फिर, भी एक संस्था को करीब 88 लाख रुपये के फर्जी भुगतान व करीब डेढ़ करोड़ रुपये की खरीद में हुई अनियमितता का मामला उजागर हो गया। इसमें 88 लाख रुपये के फर्जी भुगतान के प्रकरण की जांच ईओडब्ल्यू की ओर से की जा रही है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई ने पूरी जांच की तो इसमें और कई अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गर्दन फंस सकती है। इसे देखते हुए कर्मचारियों एवं तत्कालीन अधिकारियों में खलबली मची है।