अमेठी। भूपति भवन में चल रहे बवाल के बीच रविवार को सांसद डॉ. संजय सिंह की दोनों पुत्रियों ने अमीता सिंह के भूपति भवन में दाखिल होने के अतीत को मीडिया से साझा किया। दोनों बहनों ने कहा कि रामनगर कोट में अमीता सिंह पहली बार उनके साथ बेहद खराब हालात में दाखिल हुई थीं और बाद में महारानी बन गईं। दोनों बहनों को भय था कि कोई उन्हें देख न ले। रात में ही राजमहल के दूसरे किनारे पर स्थित एक कमरे में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी। सांसद डॉ. संजय सिंह की पुत्री महिमा और शैव्या ने बताया कि अमीता सिंह ने भूपति भवन रामनगर में पहली बार रात के अंधेरे में कदम रखा था। दोनों बहनों ने कहा कि उनके दाऊ (पिता डॉ. संजय सिंह) ने यह काम करने को कहा था। उस समय दोनों बहनें नाबालिग थीं। उन्हें नहीं पता था कि वह जिस महिला को राजमहल में दाखिल कर रही हैं उसी का एक दिन राजमहल पर कब्जा होगा। शैव्या ने बताया कि अमीता उस समय काफी डरी-सहमी थीं। रात को वह अमीता को लेकर भूपति भवन पहुंची तो उनकी बुआ श्यामा देवी (डॉ. संजय सिंह की बहन) बाहर निकलीं। अमीता गाड़ी में पीछे की सीट पर बैठी थीं। बुआ को देखकर वह सीट के नीचे दुबक गईं थीं।
अमीता ने किया पुरखों का अपमान : महिमा
अमेठी। डॉ. संजय सिंह की दोनों पुत्रियों महिमा और शैव्या ने रविवार को अमीता सिंह पर राजघराने के पुरखों के अपमान का आरोप लगाया। दोनों बहनों ने मीडिया को उस कमरे को दिखाया जहां राजमहल में लगी पुरखों की तस्वीरें धूल में बिखरी पड़ी थीं। दोनों बहनों ने कहा कि बुढ़ऊ महाराज (डॉ. संजय सिंह के पिता रणंजय सिंह) की धरोहर और वे पत्र गायब हैं जो पूर्व राष्ट्रपति वीवी गिरि, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, सरदार बल्लभ भाई पटेल, राजा कर्ण सिंह, कवि हरिवंश राय बच्चन जैसी शख्सियतों ने उन्हें लिखे थे। रविवार को युवराज अनंत विक्रम सिंह व उनकी दोनों बहनों ने राजमहल के उस हिस्से को दिखाया जहां उनके पुरखों की तस्वीरों को कबाड़ में फेंका गया था। अनंत विक्रम की बहन महिमा सिंह ने बताया कि जिस राजवंश की अमीता महारानी बन बैठी हैं, उसी के राजाओं की तस्वीरों को उन्होंने कबाड़ में फिंकवा दिया।