सुल्तानपुर। महज दो साल पहले जिले के जनांदोलनों की पहचान रहे संजय सिंह दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) को बुलंदियों पर पहुंचाने के संघर्ष में अहम किरदार बनकर उभरे हैं। बेहतर चुनाव प्रबंधन से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है। पार्टी के गठन से लेकर चुनाव तक उनके राय-मशविरे ने व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई को धार दी। इसीलिए संजय को आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबियों में माना जा रहा है। केजरीवाल से संजय की मुलाकात 2006 में आरटीआई आंदोलन के दौरान हुई। 2009 में केजरीवाल ने ग्राम पंचायतों के अधिकार बढ़ाने के लिए स्वराज आंदोलन शुरू किया तो संजय का जुड़ाव बढ़ा। संजय के आमंत्रण पर केजरीवाल ने कई बार जिले का दौरा किया, गांव में चौपाल भी लगाई। केजरीवाल की तरह माइनिंग इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले संजय को भी नौकरी रास नहीं आई और उन्होंने समाजसेवा का रास्ता चुना। संजय आम आदमी की लड़ाई लड़ते हुए आगे बढ़े। हालांकि इस दौरान उन पर कुछ आरोप लगे और मुकदमे भी हुए। 2011 में जन लोकपाल बिल को लेकर दिल्ली में हुआ अन्ना आंदोलन संजय के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। केजरीवाल के आमंत्रण पर आंदोलन में शामिल होने घर से निकले संजय दिल्ली के होकर रह गए। संघर्ष के प्रति समर्पण ने संजय को केजरीवाल का प्रिय बनाया। यहां तक की पार्टी व आगे की रणनीति बनाने में संजय की अहम भागीदारी रही। दिल्ली चुनाव में पांच विधानसभा क्षेत्रों से मैदान में उतरने के प्रस्ताव के बावजूद संजय ने सांगठनिक जिम्मेदारी ली। ऐसी व्यस्तता के चलते दो वर्ष से सुल्तानपुर आना बेहद कम हुआ, जबकि बच्चे भी यहीं रहते हैं। साफ-सुथरी राजनीति की पैरोकारी करने वाले संजय ‘आप’ के अहम स्तंभ हैं। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव नतीजों के बाद नेता विधानमंडल दल के चयन के लिए बनी चार सदस्यीय कमेटी में भी वे शामिल रहे। उनकी उपलब्धियों को लेकर जिलेवासी भी गदगद हैं। न्यूज चैनलों पर चल रही डिबेट हो या फिर आम आदमी पार्टी की जीत का जश्न, जिले के लोग संजय सिंह का चेहरा तलाशते हैं।