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लो वोल्टेज से ठप पड़े 85 राजकीय नलकूप

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सुल्तानपुर। राजकीय नलकूपों का सुचारु रूप से संचालित नहीं होना किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। दूबेपुर व कुड़वार ब्लॉक में नलकूप विभाग के 85 ट्यूबवेल का संचालन लो-वोल्टेज के चलते बंद पड़ा है।
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किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। नलकूप विभाग की ओर से लो-वोल्टेज की समस्या को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को पत्र भी लिखा गया है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ।
जिले में नहरों के बाद सिंचाई का सबसे बड़ा साधन माने जाने वाले राजकीय नलकूप सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। इस समय धान की रोपाई के लिए किसानों को पानी की सख्त जरूरत है। नहरों में पानी कम है और मांग अधिक है।
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इसके बाद किसानों की उम्मीद राजकीय नलकूपों से जुड़ी है। किसानों के उम्मीद पर अब राजकीय नलकूप भी खरे नहीं उतर रहे हैं। दूबेपुर ब्लॉक के तहत 69 राजकीय नलकूप स्थापित हैं वहीं कुड़वार विकास खंड क्षेत्र में 16 नलकूप हैं।
दोनों ब्लॉक के 85 राजकीय नलकूप लो-वोल्टेज की वजह से संचालित नहीं हो पा रहे हैं। नलकूप विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नलकूपों के संचालन के लिए कम से कम 440 वोल्ट की आपूर्ति की जरूरत होती है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 270-280 वोल्ट आपूर्ति मिल पा रही है।
इतने कम वोल्टेज में मोटर जलने की आशंका रहती है। इसलिए नलकूप संचालक ट्यूबवेल चलाने का जोखिम नहीं उठाते हैं। मोटर जलनेे के बाद बनने में भी काफी समय लग जाता है।
दूबेपुर के हसनपुर में दो राजकीय नलकूप लो वोल्टेज की समस्या के चलते पूरा खरीफ सत्र से बंद पड़े हैं। नलकूप विभाग के अधिशासी अभियंता जगदीश कुुमार बताते हैं कि नलकूपों के संचालन के लिए पर्याप्त मात्रा में विद्युत व्यवस्था को लेकर पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों को कई बार पत्र भी लिखा गया है।
कुड़वार विकास खंड क्षेत्र के अवर अभियंता रंजीत कुमार ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र में कई स्थानों पर बिजली की खपत अधिक है। इस वजह से नलकूपों को पर्याप्त विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पाती है। फिलहाल नलकूपों के संचालन के लिए हर संभव प्रयास जारी है।
जरूरत के समय नहीं चलते नलकूप
दूबेपुर ब्लॉक के हसनपुर गांव के शिवराम तिवारी, ननकऊ यादव, दिनेश धुरिया, बृजलाल मौर्य, धर्मराज यादव, सत्यनारायन यादव, गजेंद्र तिवारी, नंदलाल मौर्य समेत अन्य किसानों ने बताया कि जरूरत के समय नलकूप नहीं संचालित होते हैं।
किसानों को निजी नलकूपों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं कुड़वार के किसान शिवराज पांडेय, संतराम तिवारी, राजेश तिवारी, रघुकुल प्रसाद, दीनानाथ, राम दयाल आदि का कहना है कि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी समस्या को लेकर उदासीन बने हैं।
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