सुल्तानपुर। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से 50 हजार किसान वंचित हो गए हैं। पीड़ित किसान तहसील से लेकर जिला मुख्यालय तक का चक्कर काट रहे हैं। पोर्टल नहीं खुलने से किसानों के डाटा में संशोधन नहीं हो पा रहा है। अभी तक 2,41,661 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ मिल चुका है।
कृषि विभाग ने जिले के कुल 5,50,337 किसानों को पंजीकृत किया गया है। लोकसभा चुनाव के पूर्व केंद्र सरकार ने किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत धनराशि देने की घोषणा की थी। इस योजना के अमल में आने के बाद किसानों का सत्यापन कराया गया था।
राजस्व विभाग की ओर से किए गए सत्यापन में फर्जीवाड़ा सामने आया था। राजस्व विभाग ने कृषि विभाग में पंजीकृत हुए 95,743 किसानों को अपात्र करार दिया था। इसके बाद किसानों की संख्या घटकर 4,59,594 पहुंच गई हैं।
जिले में 2,41,661 किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की धनराशि मिल चुकी है। लोकसभा चुनाव के पूर्व कुछ किसानों को एक किस्त में दो हजार हजार रुपये और कुछ किसानों को दो किस्तों में चार हजार रुपये की धनराशि मिली थी। काफी संख्या में किसान सम्मान निधि की धनराशि पाने का इंतजार कर रहे हैं।
पोर्टल लॉक होने के कारण 50 हजार किसानों के अभिलेख में संशोधन नहीं हो पा रहा है। संशोधन नहीं होने से 50 हजार किसान प्रधानमंत्री सम्मान निधि की धनराशि पाने से वंचित हो गए हैं।
प्रधानमंत्री सम्मान निधि के लिए सरकार ने लघु व सीमांत किसानों को पात्र माना है। इसमें भी सांसद, विधायक, मंत्री, डॉक्टर, इंजीनियर, आयकर दाता समेत कई लोगों को इस योजना से अलग रखा गया है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले में 13 हजार बड़े किसान हैं। इन सभी किसानों को पहले प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए अपात्र माना गया था। सरकार ने अब सभी पात्र किसानों को इस योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है।
किसानों की सुविधा के लिए सभी तहसीलों में अभिलेख जमा करने की व्यवस्था बनाई गई है। उप निदेशक कृषि शैलेंद्र शाही ने बताया कि प्रत्येक मंगलवार को किसान अपनी तहसील में जाकर प्रधानमंत्री सम्मान निधि के लिए अभिलेख दे सकते हैं।
वहां पर संबंधित ब्लॉक के सहायक खंड विकास अधिकारी मौजूद रहते हैं। वे किसानों से अभिलेख लेकर संबंधित लेखपाल को दे देते हैं। लेखपाल किसानों के राजस्व अभिलेख का सत्यापन करके वापस कर देते हैं और उसी दिन किसानों का डाटा फीड करा दिया जाता है।
इसके अलावा किसान अपना राजस्व व अन्य अभिलेख ब्लॉक मुख्यालय पर भी जमा कर सकते हैं। ब्लॉक से किसानों का अभिलेख संबंधित तहसील भेजा जाता है। राजस्व विभाग से सत्यापन होने के बाद डाटा फीड किया जाता है।