इसौली विधानसभा क्षेत्र में पुरानी व मौजूदा गोमती नदी के तराई में स्थित करीब चार हजार एकड़ कृषि योग्य जमीन पानी से बर्बाद हो गई है। खेतों में हमेशा जलभराव बने होने की समस्या से क्षेत्र के करीब 40 गांवों के किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।
बाढ़ के दिनों में नदी का पानी व सूखे के समय में नहर का पानी छोड़ने से तराई क्षेत्र में बोई जाने वाली फसलें जलमग्न हो जा रही हैं। रही-सही कसर सीपेज पूरी कर देता है। किसान यदाकदा फसलों की बोआई कर भी लेते हैं तो सीपेज की वजह से फसलें नष्ट हो जाती हैं। सीपेज की वजह से होने वाले दलदल से फसल काटने की नौबत ही नहीं आती।
प्रत्येक वर्ष उम्मीद में किसानों का हजारों रुपया अलग से जाया चला जाता है। कई सालों से चली आ रही इस समस्या पर आज तक प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने ध्यान नहीं दिया है। इसौली विधानसभा क्षेत्र के सैकड़ों किसान सीपेज की समस्या से परेशान हैं।
ये कुड़वार, बल्दीराय व धनपतगंज विकास खंड क्षेत्र के गांव हैं। प्रभावित गांवों में बडनपुर, माधवपुर, मठा, परसपुर, गोविंदपुर, बहुबरा, मड़हा, मकदूमपुर, जज्जौर, कोलिया, अमऊ, धर्मदासपुर, जासरपुर, मुड़ुवा, सड़ाव, सोरांव, डिहवा, पूरे नंदा तिवारी, पूरे जोरई, मिझूठी, पूरे विशुनदत्त, पूरे रामबक्श शुक्ल, शिला पांडेय, भवानी का पुरवा, रैंचा, पूरे मधुवनी, नरसिंहपुर, बीही-निदुरा, चंद्रिका का पुरवा, उपरीपारा, कुमासी, दुर्गापुर, सतहरी, पर्तुजा, भरथी, सेमरौना, धनजई, बभनगवां आदि करीब 40 गांव नहर के पानी के सीपेज से प्रभावित हैं।
सीपेज का जिक्र आते ही किसानों की पीड़ा उनके चेहरे पर उभर आती है। धनपतगंज विकास क्षेत्र के गोविंदपुर गांव निवासी त्रिलोकी नाथ का कहना है कि बीते कई दशक से यह समस्या बनी है। प्रत्येक वर्ष उम्मीद में फसल की बुआई की जाती है लेकिन पानी आने से वह बर्बाद हो जाती है। मठा के राम सुंदर राय ने बताया कि इस बार चार बीघा मक्के की बोआई की थी।
कुड़वार के माधवपुर निवासी हौसिला निषाद ने बताया कि इस बार भी फसल बोई थी। कुछ बचा नहीं है। यह पानी दिसंबर के पहले नहीं सूखना है। उसके बाद नहर का पानी भर जाएगा। प्रगतिशील किसान भीष्मनारायण पांडेय ने बताया कि प्रत्येक वर्ष सीपेज से फसलें बर्बाद हो रही हैं। सांसद, विधायक व प्रशासन को प्रार्थना पत्र कई बार समस्या से अवगत कराया गया लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।