तीन आश्रय गृहों के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति
सुल्तानपुर। शासन के निर्देश पर जिले के चार आश्रय गृहों में सोमवार को मारे गए छापे में आपत्तिजनक सामग्री मिलने को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी ने एक संस्थान की ओर से संचालित तीन आश्रय गृहों के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की है।
जिला प्रोबेशन विभाग की देखरेख में अवध ग्रामीण विकास संस्थान की ओर से गोराबारिक में संचालित महिला, बालिका व बाल आश्रय गृह में देवरिया जैसी गड़बड़ी नहीं मिली लेकिन आपत्तिजनक स्थिति का खुलासा हुआ था। आश्रय गृह से छह महिलाओं के मौके पर नहीं मिलने के साथ ही शराब की खाली बोतल और शराब मिली थी। अधिकारियों के छापे में तीनों संस्थानों के संचालक एसपी सिंह के आश्रय गृह में ही निवास करने की भी पुष्टि हुई थी।
प्रतिबंध के बावजूद पुरुष संचालक का आश्रय गृह में निवास करना भी अधिकारियों ने आपत्तिजनक माना था। आश्रय गृह में बालिकाओं, महिलाओं एवं बच्चों का रहन-सहन ठीक नहीं पाया गया है। तीनों आश्रय गृहों की रिपोर्ट मिलने के बाद प्रभारी डीएम/सीडीओ राधेश्याम ने शासन से तीनों आश्रय गृहों को निरस्त करने की संस्तुति की है।
प्रभारी डीएम/सीडीओ राधेश्याम के मुताबिक तीनों आश्रय गृहों की आपत्तिजनक रिपोर्ट मिली थी। अपर मुख्य सचिव को अवध ग्रामीण विकास संस्थान से संचालित महिला, बालिका व बाल आश्रय गृह का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति की गई है। रिपोर्ट की प्रति मंडलायुक्त फैजाबाद को भी भेजी गई है।
छह महिलाओं का नहीं चला पता
महिला आश्रय गृह से लापता छह महिलाओं का पता दूसरे दिन भी नहीं चल सका है। महिलाओं के बारे में जिला प्रोबेशन अधिकारी विनोद राय तक कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रहे हैं। सोमवार को छापे के दौरान अधिकारियों की पूछताछ में संचालक एसपी सिंह व वार्डन भी कुछ स्पष्ट नहीं बता सकी थीं।
अधिकारी की मिलीभगत का अंदेशा
आश्रय गृहों की पखवारे में एक बार निरीक्षण का दायित्व बाल कल्याण समिति व माह में एक बार जिला प्रोबेशन अधिकारी का है। छापे में आपत्तिजनक चीजें मिलने से अधिकारियों की निरीक्षण रिपोर्ट भी संदेह के घेरे में आ गई है। कहा जा रहा है कि मासिक निरीक्षण में जिला प्रोबेशन अधिकारी भी लीपापोती कर रहे थे।