ढाई वर्ष से फाइलों में दबी रही ई-विलेज योजना
- चयनित गांव पखरौली का नहीं दिया गया चेक
- शासन ने जारी की थी दो लाख रुपये की धनराशि
- फिर सामने आई योजनाओं में लापरवाही
सुल्तानपुर। सरकारी योजनाओं के संचालन में लापरवाही के एक और मामले का खुलासा हुआ है। दो वर्ष पहले केंद्र सरकार से संचालित ई-विलेज योजना को अधिकारियों ने कर्मचारियों ने दबाए रखा। योजना में गांव का चयन कर लिया गया लेकिन गांव को दी जाने वाली धनराशि का चेक दो वर्ष से फाइलों दबा दिया गया। छानबीन होने पर मामले सामने आया है।
केंद्र ने वर्ष 2015 में प्रत्येक जिले में ई-विलेज योजना शुरू की थी। इसके तहत जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर एक गांव का चयन किया जाना था। केंद्र के सरकार के पत्र पर शासन के निर्देश पर जिले में वर्ष 2015 में ही भदैंया के पखरौली गांव का चयन ई-विलेज योजना के तहत कर लिया गया। विकास विभाग ने गांव का चयन करते हुए इसकी सूचना शासन को भी उसी समय भेज दी। शासन को सूचना भेजे जाने के बाद केंद्र सरकार ने चयनित गांव के लिए वर्ष 2015 में ही चयनित गांव के लिए दो लाख रुपया जारी कर दिया गया। शासन से जारी धनराशि का चेक विकास विभाग को मिला तो विभाग ने गांव को धनराशि देेने के बजाय फाइल को ही दबा दिया। गांव को धनराशि नहीं देने से ई-विलेज योजना दो वर्ष से फाइलों में ही दबी रह गई। विलेज योजना का कोई कार्य नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो दो लाख रुपये की धनराशि का चेक जिला विकास विभाग को 19 जनवरी वर्ष 2015 को ही मिल गया था लेकिन विभाग ने चयनित ग्राम पंचायत पखरौली को यह धनराशि नहीं दी। इधर, योजना की जब छानबीन हुई तो ई-विलेज योजना के लिए जारी हुआ 19 जनवरी वर्ष 2015 का चेक सामने आया। प्रकरण में तत्कालीन अधिकारियों एवं संबंधित पटल सहायक की लापरवाही सामने आई है। दो वर्ष से योजना को दबाए रखने का मामला सामने आने पर अधिकारियों के होश उड़ गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पटल सहायक से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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ई-विलेज का मकसद
केंद्र की ई-विलेज योजना के तहत ऐसे गांव का चयन किया जाना था जहां ऑनलाइन कार्य करने की सुविधा हो। विभाग की मानें तो इसमें ऐसे गांव का चयन होना था, जहां बिजली रहती हो। कंप्यूटर चलाने की सुविधा हो। ई-विलेज का मकसद ग्राम पंचायत में कराए जाने वाले कार्य को रोजाना ऑनलाइन अपडेट करना था।
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पटल सहायक से मांगा गया जवाब
जिला विकास अधिकारी डॉ. डीआर विश्वकर्मा ने बताया कि ई-विलेज योजना में पटल सहायक की लापरवाही सामने आयी है। पटल सहायक ने दो लाख रुपये का चेक दबाए रखा था। लापरवाही में पटल सहायक को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।