अमेठी क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के चलते कच्चे मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। तहसील क्षेत्र में बारिश के चलते पखवारे भर में करीब 195 मकान गिर गए। इन मकानों के जमींदोज होने से करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
मकानों के मलबे में लोगों के खाने-पीने के सामानों के साथ ही मवेशियों का भूसा भी बर्बाद हो गया। प्रशासन की ओर से दी जा रही सहायता राशि ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।
लगातार हो रही बारिश लोगों के लिए आफत बन रही है। बारिश का पानी लोगों के घरों तक घुस जा रहा है। इससे सारा सामान बर्बाद हो जा रहा है। सीलन से कच्चे मकान धराशायी हो रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते पखवारे भर में क्षेत्र में बारिश के चलते करीब 195 कच्चे मकान ढह गए हैं। बैठका, पशुशाला व आंशिक रूप से गिरे मकानों की गिनती इसमें नहीं है।
मकान गिरने से बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान हुआ है। इसमें जहां लोगों के कपड़े, राशन व अन्य सामान मिट्टी के मलबे में दब गए हैं वहीं मवेशियों के लिए रखा भूसा भी बर्बाद हो गया है। ऐसी स्थिति में लोगों के सामने दो जून की रोटी के लाले पड़े हैं। मवेशियों के लिए चारे का संकट अलग से है। प्रशासन की ओर से पूरा मकान गिरने पर अधिकतम सहायता राशि साढ़े 17 हजार से 20 हजार तक दी जा रही है।
अमूमन एक कच्चा मकान बनाने में करीब तीन से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। गरीब से गरीब व्यक्ति के घर में भी लाख रुपये से कम की संपत्ति नहीं होती है। ऐसे में प्रशासन की ओर से दी जा रही राशि पीड़ितों के ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है।