किताबों की खरीद में लुट रहे छात्र व अभिभावक
अधिकृत प्रकाशनों की सभी कक्षाओं की पुस्तकें नहीं रखते विक्रेता
किसी भी पुस्तक विक्रेता पर नहीं हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
सुल्तानपुर। पुस्तक विक्रेताओं का एक और गोरखधंधा सामने आया है। एक-दो विद्यालयों से सांठगांठ करके उन्हीं से संबंधित पुस्तकें बेच रहे हैं। सभी बोर्डों एवं अधिकृत प्रकाशनों की पुस्तकें न बेचकर अभिभावकों व छात्रों को लुटने पर मजबूर कर दिए हैं। शिक्षा विभाग एवं विद्यालयों से तालमेल बिठा पुस्तक विक्रेताओं का यह गोरखधंधा वर्षों से फल-फूल रहा है। अभी तक किसी पुस्तक विक्रेता के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। इसी से अधिकारियों की लापरवाह कार्यशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ऐसे चल रहा गोरखधंधा
गाइड लाइन की मानें तो पुस्तक भंडारों को सभी बोर्डों (यूपी बोर्ड, सीबीएसई व आईसीएसी बोर्ड) व अधिकृत प्रकाशन की सभी कक्षाओं की पुस्तकें रखने के निर्देश हैं। इसके विपरीत पुस्तक विक्रेता एक-दो विद्यालयों से तालमेल बिठाकर उन्हीं से संबंधित पुस्तकें बेच रहे हैं। अन्य बोर्डों, विद्यालयों एवं प्रकाशनों से संबंधित पुस्तकें उनके यहां नहीं मिल पाती हैं। यही नहीं उनके यहां बिकने वाली पुस्तकें दूसरे पुस्तक विक्रेताओं के यहां नहीं मिलती हैं। सिर्फ एक-दो दुकान पर ही पुस्तकें मिलने से अभिभावक व छात्र संबंधित पुस्तक विक्रेता के यहां लुटने को मजबूर हैं। यही वजह है कि पुस्तक बिक्री के नाम पर दुकानदारों का ही सिक्का चल रहा है।
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शिक्षा विभाग व प्रशासन एक-दूसरे से आगे
पुस्तक विक्रेताओं के वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे पर प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारियों का पूरा वरदहस्त है। इसका अंदाजा कार्रवाई प्रक्रिया से लगाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो शिक्षा विभाग प्रत्येक वर्ष कागजों में निरीक्षण दिखाकर आंकड़ेबाजी करता चला आ रहा है लेकिन बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अभी तक एक भी पुस्तक विक्रेता पर कार्रवाई नहीं की। यही नहीं प्रशासन इससे और आगे है। प्रशासन ने वर्षों से लुटते आ रहे छात्रों एवं अभिभावकों के मामले में कभी न तो हस्तक्षेप किया और न ही टीम गठित करके कार्रवाई कराई। नतीजा सबके सामने है।
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हजार से अधिक संख्या में खुल गई पुस्तक की दुकानें
सूत्रों की मानें तो पुस्तक बिक्री में चल रहे गोरखधंधे में अच्छी खासी आमदनी प्रत्येक वर्ष हो रही है। अन्य दुकानों में वर्ष भर कमाई कर बचत करने वालों की अपेक्षा पुस्तक विक्रेता अप्रैल, मई व जुलाई में ही उससे अधिक बचत कर ले रहे हैं। साल भर की कमाई वे सिर्फ तीन माह में कर रहे हैं। शायद यही वजह से मौजूदा समय में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक एक हजार से अधिक दुकानें पुस्तकों की खुल गई हैं।
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बीएसए व डीआईओएस से लेंगे जानकारी
जिलाधिकारी हरेंद्र वीर सिंह ने कहा कि मुझे शासन की गाइड लाइन की जानकारी नहीं है। बीएसए एवं डीआईओएस को तलब कर जानकारी ली जाएगी। इसके बाद जांच करवाकर कार्रवाई कराई जाएगी।