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पूर्ति

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कागजों पर संचालित हो रही सतर्कता समितियां
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- कोटेदारों ने नहीं लिखाया सदस्यों का नाम व नंबर
- कार्डधारक कहां करें शिकायत
- प्रचार-प्रसार के अभाव में लोगों को नहीं मिली जानकारी
सुल्तानपुर। गरीबों को कोटे से मिलने वाले राशन में घटतौली, अधिक मूल्य वसूली और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए जिले में गठित की गई सतर्कता समितियां कागजों पर ही संचालित हो रही हैं। पूर्ति विभाग के आदेश को दरकिनार करके कोटेदारों ने सतर्कता समितियों के सदस्यों के नाम व उनका मोबाइल नंबर नहीं लिखाया है। ऐसे में कार्डधारकों को अपनी शिकायतें कहां दर्ज करानी हैं, की जानकारी नहीं है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत पात्र गृहस्थी व अंत्योदय कार्ड धारकों को सरकार कोटे की दुकानों के माध्यम से सस्ते दर पर गेहूं व चावल का वितरण कराती है। इन योजनाओं में कालाबाजारी आम बात हो गई है। इस पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने योजना तैयार की थी। शासन के खाद्य एवं रसद अनुभाग ने 20 जनवरी 2016 को उप्र खाद्य सुरक्षा नियमावली 2015 के तहत सतर्कता समितियां गठित करने का निर्देश दिया था। शासन ने यह आदेश पूर्ति विभाग को 27 मार्च 2017 को भेजकर इसका अनुपालन कराने को कहा था। इसके अनुपालन में जिलापूर्ति अधिकारी संजय कुमार प्रसाद ने 30 मार्च 2017 को क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी व सभी पूर्ति निरीक्षकों को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि सतर्कता समितियों का गठन करके प्रत्येक उचित दर विक्रेता की दुकान पर एक बोर्ड पर अथवा दुकान की मुख्य दीवार पर पेंट से सतर्कता समिति के सदस्यों के नाम व उनके मोबाइल नंबर दर्ज करें। जिससे कोई भी व्यक्ति राशन वितरण में घटतौली, अधिक मूल्य वसूली, कालाबाजारी समेत अन्य शिकायतें सुविधाजनक ढंग से कर सकें। ग्रामसभा की खुली बैठक करके और नगरीय क्षेत्र में वार्ड वार उपभोक्ताओं की बैठक करके समिति के बारे में जानकारी दिए जाने का भी आदेश दिया गया था। पूर्ति विभाग की मानें तो सभी गांवों और शहर के मोहल्लों सतर्कता समितियां गठित की जा चुकी है। विभाग ने सभी दुकानों पर सतर्कता समितियों के सदस्यों का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज कराए जाने का दावा किया है। पर, हकीकत इससे उलट है। जिले की ज्यादातर सरकारी कोटे की दुकानों पर सदस्यों का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज नहीं हैं। कागजों में ही सतर्कता समितियां संचालित हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कार्डधारक व आम लोग अपनी शिकायत कहां दर्ज कराएं।
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ग्रामप्रधान होता अध्यक्ष
सुल्तानपुर। सतर्कता समिति में ग्रामप्रधान को अध्यक्ष बनाया जाता है। ग्राम विकास अधिकारी, प्रधानाध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एक निशक्त, एक दलित महिला सदस्य होती है। संबंधित ब्लॉकों के खंड विकास खंड अधिकारी को सतर्कता समिति का गठन करने का दायित्व सौंपा गया था।
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शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई: डीएसओ
सुल्तानपुर। जिलापूर्ति अधिकारी संजय कुमार प्रसाद ने बताया कि जिले के सभी गांवों व शहर के वार्डों में सतर्कता समितियां गठित की गई हैं। दावा किया कि कोटेदारों ने समिति के सदस्यों का नाम व मोबाइल नंबर दुकान पर दर्ज कराया है। कहीं से भी समिति के सदस्यों का नाम व मोबाइल नंबर नहीं दर्ज होने की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर संबंधित कोटेदार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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