सुल्तानपुर। सरकार की तमाम कोशिशों व दिशा निर्देशों के बावजूद अभी तक जिले की इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल हजारों गन्ना किसानों का भुगतान नहीं कर पाई है। चीनी मिल पर किसानों का 16 करोड़, 38 लाख, 31 रुपये बकाया चल रहा है।
पेराई सत्र का समापन हुए पांच माह बीत गए, लेकिन किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल पाया है। जिले की इकलौती किसान चीनी मिल गन्ना किसानों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का भुगतान कर पाने पर चीनी मिल फेल हो चुकी है। किसान गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल पाने से मायूस हैं। बकाया भुगतान पाने के लिए गन्ना किसान चीनी मिल का चक्कर काट रहे हैं।
उद्योग के नाम पर जिले की पहचान बनी इकलौती किसान सहकारी चीनी मिल संकट से उबर नहीं पा रही है। पांच दिसंबर 2019 को चीनी मिल में गन्ना पेराई शुरू हुई थी। करीब चार माह तक गन्ना की पेराई करने के बाद चीनी मिल में तकनीकी खराबी आने के कारण बंद हो गई और 10 अप्रैल 2020 को यहां का गन्ना केएम शुगर मिल मसौधा अयोध्या भेज दिया गया था।
पेराई सत्र के दौरान किसान सहकारी चीनी मिल साढ़े आठ लाख क्विंटल गन्ना की पेराई कर पाई थी। किसानों के खरीदे गन्ने का मूल्य 27 करोड़, पांच लाख, 42 हजार रुपये हुआ था। चीनी मिल ने 10 करोड़, 67 लाख, 11 हजार रुपये का भुगतान किसानों को कर दिया है।
अभी भी 16 करोड़ 38 लाख, 31 हजार रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल ने नहीं किया है। जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ सहायक अखिलेश पांडेय ने बताया कि 23 तनवरी 2020 तक खरीदे गए गन्ना मूल्य का भुगतान चीनी मिल ने किया है।
सरकार ने गन्ना किसानों का मूल्य भुगतान करने के लिए 14 दिन का समय निर्धारित किया है। निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर चीनी मिल को बकाया पर ब्याज देने का प्राविधान है। यहां पर ब्याज देने को कौन कहे चीनी मिल किसानों को उनका बकाया मूल्य ही नहीं दे पा रही है।
किसान सहकारी चीनी मिल के जीएम रामजी सिंह ने बताया कि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कराने के लिए चीनी मिल प्रबंधन की ओर से लगातार प्रयास किया जा रहा है। शासन से धनराशि की मांग करने के लिए पत्र भेजा गया है। शासन से धनराशि मिलते ही किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करा दिया जाएगा।