आम की विलुप्त प्रजातियां सहेज रहे सुहेल आलम
सुल्तानपुर। क्षेत्र के गौराबारामऊ निवासी सुहेल आलम आम की विलुप्त हो रही प्रजातियों को सहेजने में लगे हैं। पुरखों की इस धरोहर का उनकी खूबियों के आधार पर नामकरण भी किया है।
नरेंद्रदेव कृषि विवि कुमारगंज के पूर्व कुलपति ने उनकी बाग का भ्रमण कर एक आम का नाम नरगिस रख दिया। आम की पुरानी व नई बाग की देखरेख सुहेल आलम अपने पिता अब्दुल रहमान खान के सहयोग से कर रहे हैं।
उन्होंने बुजुर्गों के लगाए गए देसी आमों के पेड़ों को संजोना शुरू कर दिया है। आम की खूबियों के आधार पर उसका नामकरण किया है। नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के पूर्व कुलपति राकेश एम दगनी ने उनकी बाग का भ्रमण कर एक देसी आम का नाम नरगिस रखा है।
वर्तमान कुलपति डॉ. जेएस संधू ने सुहेल आलम के कार्यों की सराहना की है। कुलपति ने बताया कि इस काम में उन्हें दिलचस्पी है। इसकी जिम्मेदारी उद्यान विभाग के सीनियर प्रोफेसर डी राम को दी है। क्षेत्र का भ्रमण कर आम की देसी विलुप्त हो रही प्रजातियों को चिह्नित कर विश्वविद्यालय परिसर में सजोया जाएगा।
कुलपति ने निदेशक प्रसार प्रो. राव को विश्वविद्यालय कैंपस में मैंगो सेमिनार मनाने पर विचार विमर्श किया। इसमें अगल-बगल जिले के बाग किसानों को शामिल होने का मौका मिलेगा।
इस मौके पर प्रसार उद्यान विभाग के वरिष्ठ प्रो. डी राम, केवीके बरासिन के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।