अमेठी। बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में काफी समय से जर्जर पड़े 156 स्कूल भवनों (प्राथमिक व उच्च प्राथमिक) को चिह्नित कर उनके ध्वस्तीकरण की कवायद शुरू कर दी है।
बेसिक शिक्षा विभाग की रिपोर्ट को अनुमोदित करते हुए डीएम ने पीडब्ल्यूडी को पत्र भेजकर भवनों की मूल्यांकन रिपोर्ट तलब की है। पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट मिलने पर शासन को भेजकर ध्वस्तीकरण की अनुमति मांगी जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले में संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के 156 भवन काफी समय से जर्जर व निष्प्रयोज्य पड़े हैं।
इन भवनों के जर्जर होने के बाद इसी कैंपस में दूसरे भवन बनाए गए लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण इन्हें अब तक गिराया नहीं गया है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से ये कवायद भवन के अचानक ढहने से होने वाले संभावित हादसे से बचने के मद्देनजर शुरू की गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से तैयार प्रस्ताव को अनुमोदित कर तत्कालीन डीएम डॉ. राम मनोहर मिश्र ने मूल्यांकन के लिए पीडब्ल्यूडी को भेजा था।
पीडब्ल्यूडी की मूल्यांकन रिपोर्ट मिलने के बाद इसे शासन को भेजकर ध्वस्तीकरण की अनुमति ली जाएगी। अनुमति मिलते ही भवनों को ढहाने का काम शुरू किया जाएगा।
बीएसए विनोद कुमार मिश्र ने बताया कि प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों के जर्जर भवनों की तैयार सूची में सर्वाधिक 43 विद्यालय गौरीगंज के हैं। इसके अलावा संग्रामपुर के 12, भेटुआ के 29, अमेठी के चार, मुसाफिरखाना के 41, तिलोई के 15 व शाहगढ़ तथा जामों के छह-छह स्कूल भवन शामिल हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग को जर्जर भवनों के साथ ही ऐसे स्कूलों की भी सूची बनानी चाहिए, जिनकी छतों से पानी टपक रहा है।
जिले के कई ऐसे परिषदीय स्कूल भवन हैं जहां पठन-पाठन कार्य हो रहा है लेकिन उनकी छतों से बरसात में पानी टपकता है। ऐसे में कमजोर छतों की समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो ये भी हादसे की कगार पर पहुंच जाएंगी।