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खंगाली जाएगी संस्कृत विद्यालयों की कुंडली

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गौरीगंज। कागजों पर संचालित होने वाले जिले के संस्कृत विद्यालयों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। ऐसे विद्यालयों पर अब शासन की नजरें टेढ़ी हो गई है जो बिना मान्यता के संचालित हैं या फिर उनमें बच्चों की संख्या महज कागजों पर दर्ज है।
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शासन के निर्देश पर जेडी के नेतृत्व में गठित जांच टीम किसी भी दिन इन विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर कुंडली खंगाल सकती हैं। टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद शासन मानक पर खरा न उतरने वाले विद्यालयों की मान्यता समाप्त कर सकता है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद संस्कृत बोर्ड से मान्यता प्राप्त कर कागजों पर संचालित संस्कृत विद्यालयों को शासन ने बंद करने का निर्णय लिया है। कवायद सफल हो सके इसके लिए शासन ने जेडी के नेतृत्व में एक टीम का गठन कर सभी वित्तीय मान्यता प्राप्त व वित्तविहीन मान्यता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के औचक निरीक्षण का निर्देश दिया है।
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जेडी के नेतृत्व में गठित टीम में संबंधित जिले के डीआईओएस, लेखाधिकारी व डीआईओएस शामिल होंगे। औचक निरीक्षण पर निकलने वाली यह टीम संस्कृत के प्राथमिक से लेकर एमए और बीएड तक की कक्षाएं संचालित करने वाले महाविद्यालयों का निरीक्षण करेगी।

निरीक्षण के दौरान नामांकित बच्चों की संख्या, मौजूद बच्चों की संख्या, शिक्षकों की उपस्थिति, विद्यालय में कमरों की संख्या, बच्चों के बैठने के साथ ही अन्य व्यवस्थाएं जांची जाएंगी। औचक निरीक्षण के बाद टीम का नेतृत्व करने वाले जेडी अपनी रिपोर्ट शासन को भेजेंगे।

रिपोर्ट मिलने के बाद शासन ऐसे विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने की कार्रवाई करेगा। जिले में संस्कृत विद्यालयों की संख्या 10 है। इनमें आठ माध्यमिक स्तर तथा दो महाविद्यालय स्तर तक की वित्तीय मान्यता प्राप्त हैं। एक विद्यालय वित्तविहीन मान्यता प्राप्त है।
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