रोजगार के साथ जागरूकता फैला रही पैडवूमेन
सुल्तानपुर। फिल्म ‘पैडमैन’ से सुर्खियां बटोर रहे अक्षय कुमार से काफी पहले जिले की संजू ऐसे ही मिशन में लगी हैं। जिले की पैडवूमेन के नाम से मशहूर हो रहीं संजू न सिर्फ खुद स्वावलंबी हैं बल्कि ग्रामीण अंचलों में सैनिटरी पैड से अनभिज्ञ महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर उन्हें जागरूक कर रही हैं। तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद आज उनके समूह से निर्मित पैड की कारागार की महिला सेल, महिला अस्पताल, आगंनबाड़ी केंद्रों में सप्लाई हो रही है।
पंचायत विभाग की ओर से वर्ष 2015 में महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए शुरू हुआ काम दूबेपुर की दादूपुर गांव की संजू पत्नी संतोष के लिए वरदान साबित हुआ। करीब साढ़े तीन लाख की लागत से बनी मशीन पर तकनीशियन ने उन्हें पैड बनाने के लिए प्रशिक्षित किया। उसके बाद दूबेपुर ब्लॉक के अकारीपुर गांव में संजू ने स्वयं सहायता समूह बनाकर दर्जनों महिलाओं को पैड बनाने का हुनर सिखाया।
संजू की मानें तो औसतन पांच सौ पैड जिले में प्रतिदिन तैयार होता है। इन पैड की सप्लाई फैजाबाद, सुल्तानपुर, अंबेडकरनगर के कारागार में महिला सेल, आंगनबाड़ी केंद्र, जिला महिला अस्पताल के साथ ही महिलाओं के स्कूल में की जाती है। समूह से जुड़ी महिला को प्रतिमाह तीन हजार रुपये मेहनताना मिलता है। संजू व अनीता कहती हैं कि ग्रामीण अंचलों की महिलाओं की नैपकिन को लेकर छिपी झिझक खत्म करने का फैसला किया था। ग्रामीण की महिलाओं को पैड के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
‘महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना उद्देश्य’
ग्राम विकास अधिकारी संगीता पाल कहती हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पैड निर्माण की शुरुआत की गई थी। इसकी मशीन की कीमत करीब साढ़े तीन लाख रुपये है। मशीन पंचायत विभाग की ओर से खरीदी गई थी। अकारीपुर व अखंडनगर में नया प्लांट खोलने को 18.81 लाख रुपये मिले हैं। इससे अकारीपुर में बाउंड्रीवाल और अखंडनगर में नई मशीन व बिल्डिंग बनाई गई है। इससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।