दसवें वेतन समझौते सहित 15 सूत्री मांगों को लेकर कोयला खनन एवं अन्य प्रमुख उद्योगों से जुड़े कामगारों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल दो सितंबर को होगी। इसके लिए पूर्व संध्या पर इंटक, एटक, सीटू और इससे जुड़े संगठनों के प्रतिनिधि सुबह से देर शाम तक ककरी, बीना खड़िया, दुधीचुआ, अमलोरी, निगाही, जयंत, गोरबी, सिंगरौली मुख्यालय आदि का भ्रमण कर कर्मियों से संपर्क करने में लगे रहे।
नुक्कड़ सभा के जरिए भी मांगों को जायज बताते हुए हड़ताल को सफल बनाने की अपील की जाती रही। उधर, बीएमएस और सीटिया ने हड़ताल से अलग रहने का ऐलान किया है। इससे जुड़े सदस्य इस दिन रोजाना की भांति काम पर जाएंगे।हड़ताल से जुड़ी ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र सरकार मजदूर विरोधी नीतियां अपना रही है। दसवें वेतन समझौता के लिए पहल नहीं हो रही है।
ठेका एवं आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त करने और इसमें लगे मजदूरों को स्थाई करने, समान काम के लिए समान वेतन देने, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संशोधन बंद करने, मुनाफा कमाने वाले सार्वजनिक क्षेत्र का विनिवेश बंद करने आदि की मांग पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं बीएमएस और सीटिया के लोगों का कहना कि हड़ताल के बिंदुओं में कोल इंडिया से जुड़े मुद्दे शामिल नहीं है।
इसलिए हड़ताल से अलग रहने का फैसला लिया गया है। सीटिया के एनसीएल जोन सचिव बीके पटेल के मुताबिक उनका संगठन न तो हड़ताल का समर्थन करेगा, न ही विरोध। तकनीकी कर्मी रोजाना की भांति शुक्रवार को ड्यूटी पर जाएंगे।