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एंबुलेंस न आने से नसंबदी के बाद पूरी रात अस्पताल में रहीं महिलाएं

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घोरावल। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोरावल में सोमवार को महिलाओं की नसबंदी के बाद महिलाओं को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सारी रात महज दो डॉक्टरों ने मिलकर करीब 180 महिलाओं की नसबंदी की। पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस की व्यवस्था न होने से पूरी रात नसबंदी कराने वाली महिलाओं को एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा और अगले दिन मंगलवार सुबह दस बजे तक महिलाओं को उनके घर पर पहुंचाया गया। स्वास्थ्य विभाग घोरावल सीएचसी में प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को नसबंदी शिविर लगाता है। सोमवार को सुबह से ही नसबंदी कराने के लिए ग्रामीण इलाकों से आई महिलाओं का रजिस्ट्रेशन किया जाने लगा। दोपहर बाद जिला मुख्यालय से आए डॉ. एपी सिंह व सीएचसी अधीक्षक डॉ. मुन्ना प्रसाद ने महिलाओं की नसबंदी करना शुरू किया। उधर शाम होते-होते नसबंदी के लिए करीब 180 महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया। उधर दोनों चिकित्सक सारी रात नसबंदी करते रहे और भोर तक नसबंदी कार्यक्रम चलता रहा। मात्र दो चिकित्सकों ने 180 महिलाओं की नसबंदी करना स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था व कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। इसकी वजह यह है कि मानक के अनुरूप एक चिकित्सक मात्र 30 महिलाओं की नसबंदी कर सकता है। स्वास्थ्य विभाग की इस व्यवस्था से न केवल डॉक्टर पर कार्य बोझ अत्यधिक हो जाता है, वहीं इससे नसबंदी कराने वाली महिलाओं की जान जोखिम में पड़ जाती है। बताया गया कि सीएचसी का कार्य क्षेत्र काफी बड़ा है और रिमोट एरिया के गांवों की दूरी 40 किमी तक है। खरमास बीतने के बाद नसबंदी के लिए भीड़ उमड़ पड़ती है। स्वास्थ्य विभाग इसका अनुमान लगाने में विफल रहा। परसौना, तेंदुहार, लाली, मूर्तिया, घुवास, बरदिया, करमा, केकराही, तिलौलीकला आदि दूरदराज के गांवों से नसबंदी के लिए आई महिलाओं को नसबंदी कराने के बाद घर वापस लौटने के लिए घंटों एंबुलेंस का इंतजार करना पड़ा। उधर अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था न होने से महिलाओं को रात में दिक्कतें हुई। महिलाओं को हो रही परेशानियों को देखते अधीक्षक ने करमा, केकराही व शाहगंज से एंबुलेंस बुलवाया। इतनी मशक्कत के बाद भी महिलाओं को मंगलवार को सुबह दस बजे तक घर पहुंचाया गया। उधर एंबुलेंस की पर्याप्त व्यवस्था न होने से नसबंदी कराने वाली महिलाओं में काफी आक्रोश व्याप्त रहा।
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