लापता मजदूरों की तलाश में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर बैठी पत्नी मां एवं अन्य। -- संवाद
सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी स्थित खदान में रेस्क्यू ऑपरेशन मंगलवार को दोपहर बाद बंद कर दिया गया। प्रशासन ने दावा किया है कि अब अंदर मलबे में किसी के होने की कोई संभावना नहीं है। दूसरी ओर जुगैल के राम खेलावन और रामनरेश का अब तक पता नहीं चला है। दोनों मजदूर खदान में काम करने के लिए घर से निकले थे।
उन्होंने घरवालों से वादा किया था कि 15 नवंबर को काम खत्म कर 16 को जरूर घर लौटेंगे। हादसे के बाद से वह लापता हैं। परिवार के लोग कभी घटनास्थल तो कभी पोस्टमार्टम घर पर दौड़ लगा रहे हैं, मगर उनका कहीं पता नहीं चल पाया। ऐसे में दोनों मजदूर कहां गए? चर्चाएं जारी हैं।
जुगैल के खोखरीडांड़ टोला निवासी मानमति ने बताया कि उसके पति रामकिशुन और पड़ोस में रहने वाले राम खेलावन दो सप्ताह से हादसे वाली खदान में ड्रीलिंग का काम कर रहे थे। तीन-चार दिन पहले घर आए थे। जाते समय कहा था कि रविवार को वह फिर वापस आएंगे। काम के दौरान खनन क्षेत्र में बनी झोपड़ी में ही रहते थे। मां धनसिरिया और बहन फुलबसिया ने बताया कि दोनों लोग पड़ोसी होने के नाते एक साथ काम पर आते-जाते थे। रविवार को उन्होंने आने की बात कही थी लेकिन सुबह गांव के ही कुछ लोगों ने बताया कि वह जिस खदान में काम कर रहे थे, उसमें हादसा हो गया है। घटनास्थल पर पहुंचने पर जानकारी मिली कि वह मलबे में दब गए हैं लेकिन अब तक न तो उनके बारे में कोई जानकारी मिल पाई है न ही उनके शव मिले।
रामखेलावन की पत्नी दशमतिया और मां मित्तक भी मंगलवार को सुबह से पोस्टमार्टम हाउस की तरफ टकटकी लगाए हुए थीं। उनका कहना था कि दोनों साथ में काम करते थे। हादसे के बाद से उनका पता नहीं चल पा रहा है। उम्मीद थी कि शायद शव के रूप में उनकी जानकारी सामने आ जाए लेकिन अब तक जो सात शव बरामद हुए हैं, उनमें कोई भी रामकिशुन या रामलखन का नहीं है। दाेनों मजदूरों के परिजनों का दावा था कि हादसे के वक्त दोनों खदान में कंप्रेशर मशीन चला रहे थे। ऐसे में पता न चल पाने की बात उन्हें हजम नहीं पा रही है। अब प्रशासन ने इसको लेकर हाथ खड़े कर लिए हैं। ऐसे में वह उन्हें ढूंढने के लिए कहां जाएं, समझ में नहीं आ रहा।