सोनभद्र। जल संरक्षण के लिए ग्रामीण इलाकों में अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं। पुराने तालाबों को संवारा जा रहा है। स्वतंत्रता सेनानियों से जोड़कर उसे खास पहचान दी जा रही है। वहीं नगरीय क्षेत्र के तालाबों की कोई सुध नहीं है। नगर पालिका परिषद स्थित कई तालाब बदहाली के शिकार हैं। कहीं तालाब की भूमि पर अतिक्रमण कर लिया गया है तो कहीं उसमें गंदगी और कूड़ा उड़ेला जा रहा है। बदहाली से यह तालाब कराह रहे हैं। अतिक्रमण और कूड़े का जहर पी रहे तालाब अमृत मांग रहे हैं। जल संरक्षण के साथ यह तालाब लोगों की आस्था के भी प्रतीक हैं। उनकी बेकद्री से लोगों में असंतोष है।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से देश के सभी जिलों में 75 तालाबों की खोदाई तथा सुंदरीकरण करते हुए जल संरक्षण के लिए निर्देशित किया गया है। इस क्रम में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत तालाबों की खोदाई के साथ ही सुंदरीकरण का काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त मनरेगा के तहत 286 तालाबों की खोदाई कराई जा रही है लेकिन इकलौती नगर पालिका परिषद सोनभद्र क्षेत्र के सार्वजनिक तालाबों के संरक्षण एवं अतिक्रमण मुक्त करने का प्रशासन सुध नहीं ले रहा है। सुंदरीकरण के बाद भी जहां रामसरोवर तालाब गंदगी के कारण स्नान करने लायक नहीं है। वहीं दीपनगर तालाब के पत्थर दरकने लगा है। वहीं अकड़हवा व जोगियाबीर मोहाल स्थित तालाब पर अतिक्रमण बढ़ रहा है। नगरीय क्षेत्र के तालाबों की उदासीनता को लेकर लोगों में आक्रोश भी पनप रहा है।