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Sonebhadra News: जो होना है हो, हम नहीं लगवाएंगे टीका...

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सोनभद्र। बच्चों को बीमारियों से बचाने में टीकाकरण भले ही कारगर हो, लेकिन जिले के एक हजार से अधिक बच्चों के परिजन उन्हें यह सुरक्षा देने के लिए तैयार नहीं हैं। हाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी हर कोशिश कर थक चुके, लेकिन वह बच्चों का टीकाकरण नहीं कराते। उनका दो टूक कहना होता है कि बच्चों को जो होना है हो जाय, लेकिन टीका नहीं लगवाएंगे। इसके पीछे जागरुकता की कमी और अशिक्षा को मुख्य वजह मानी जा रही है।
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आदिवासी बहुल जिले में बड़ी आबादी आज भी अशिक्षा और अंधविश्वास का दंश झेल रही है।
घातक बीमारियों से बच्चों को जीवनभर के लिए सुरक्षित रखने के लिए यह वैक्सीनेशन जरूरी है। शुरुआती टीके न मिलने से भविष्य में उनमें कई संक्रामक बीमारियों का जोखिम हो सकता है। हैरानी की बात कि जिले में स्वास्थ्य विभाग के तमाम जागरूकता अभियान के बावजूद बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को टीका लगवाने से इंकार कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में साढ़े चार सौ से अधिक परिवारों के करीब 1090 बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित हैं। ऐसे में इन बच्चों में कई घातक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

बच्चों को लगते हैं टीके

जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली के माध्यम से बच्चों को 12 से अधिक अलग-अलग टीके निशुल्क प्रदान किए जाते हैं। इसमें बीसीजी, ओपीवी, हेपेटाइटिस बी, पेंटावेलेंट, रोटावायरस वैक्सीन, डीपीटी और टीटी जैसे टीके शामिल हैं। ये जन्म से लेकर अलग-अलग समय पर लगते हैं। इसके लिए प्रत्येक गांव में विशेष टीकाकरण सत्रों का आयोजन किया जाता है।
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इस क्षेत्र के लोग कर रहे टीकाकरण से इन्कार
जिले में टीकाकरण से इंकार करने वालों में सबसे अधिक आदिवासी समाज के लोग हैं। जिनमें आज के समय में भी तरह-तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। टीकाकरण से इन्कार करने वाले क्षेत्रों में दुद्धी, चोपन म्योरपु, नगवां और कोन क्षेत्र के लोगों की तादाद अधिक है।
इन ब्लॉकों के डूभा, बरवाटोला, चपकी, बिजौली, सेमरिया, पिपराडीह, रामपुर, चिचलिक, पनौरा, पल्हारी, तेनुआं, बलियारी, मांची, नगवां, चेरूई, मकरीबारी, चाचा काॅलोनी रेणुकूट, अनपरा की धरकार बस्ती, सेंदूर, माटी कला, नेमना, नधिरा, चरचनवा, घोरावल के मूर्तियां, कोलानी, चौहान मझिगवां, जमगाई सहित अन्य इलाके शामिल हैं।
वैक्सीनेशन बेहद जरूरी
लोगों को घातक बीमारियों से बचाने के लिए बचपन में ही टीकाकरण जरूरी है। इसके लिए सुरक्षित और प्रभावी टीके मौजूद हैं। वैक्सीनेशन जरूरी है। इसके न होने से गंभीर बीमारियों का खतरा बना होता है। एक जिम्मेदार होने के नाते सभी अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को टीका समय पर लगवाएं। यह सुरक्षित और निशुल्क है। -डॉ. अश्वनी कुमार,सीएमओ।
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