चार दशक से अधिक समय की पुरानी कनहर सिंचाई परियोजना निर्माण से क्षेत्र के किसानों को काफी उम्मीद है। इस वर्ष उम्मीद थी कि बांध में पानी भरेगा और आसपास के इलाकों का जलस्तर सुधरेगा लेकिन दो वर्ष से लगातार कोरोना महामारी के कारण महामारी के चलते कनहर सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है।
कनहर सिंचाई परियोजना का निर्माण पिछले साल से अब तक बांध में छिटपुट काम चलता रहा लेकिन कोई बड़ा युद्ध स्तर पर काम नहीं हो सका। उसका मुख्य कारण वैश्विक महामारी बताई जाती है। परियोजना के निर्माण कार्य सुस्त पड़ने से क्षेत्र के किसानों को झटका लगा है। किसानों का मानना था कि 2021 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा लेकिन कोरोना महामारी के चलते निर्माण कार्य में काफी विलंब हुआ। इससे परियोजना का निर्माण कार्य करीब एक से दो वर्ष आगे बढ़ गया। यानी अब इस मानसून में बांध में पानी नहीं भरेगा। इस परियोजना का शिलान्यास 46 साल पहले छह अक्तूबर 1976 को तत्कालीन मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश नारायण दत्त तिवारी ने किया था। यहां काफी काम हो चुका है लेकिन एक तरफ खुला होने के कारण पानी नहीं रुकेगा।
जिले के 108 गांवों को होना है लाभान्वित
कनहर सिंचाई परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने से दुद्धी ब्लॉक और चोपन के 108 गांव के असिंचित खेतों की भूमि की सिंचाई होगी। खेत सिंचित होकर हरा भरा हो जाएंगे और खेतों से फसलों की हरियाली देखने को मिलेगी। क्षेत्र में भूगर्भ जल स्तर में तेजी से वृद्धि होगी लेकिन यह सब कुछ अभी तक नहीं हो सका। यह सब होने में करीब एक से दो वर्ष के भीतर होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अक्तूबर-नवंबर में रॉक फीलिंग का होगा काम
कनहर सिंचाई परियोजना के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार ने बताया कि कनहर सिंचाई परियोजना के गेट डिजाइन आज आ चुके हैं। फाइनल हो गए हैं अगले वर्ष अक्टूबर-नवंबर में रॉक फीलिंग बांध बांधने का कार्य तथा बांध के गेट लगाए जाने का कार्य शुरू किए जाने की पूरी संभावना व्यक्ति किया। उन्होंने बताया कि परियोजना के निर्माण कार्य के लिए 2239 करोड़ बजट का प्रावधान शासन के द्वारा किया गया था। इस परियोजना निर्माण पर अब तक 2000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। परियोजना के निर्माण में धन की कोई कमी नहीं है। सिंचाई परियोजना से छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड राज्य के जिलों को भी सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था होनी है।