बूंद-बूंद को लेकर मची मारामारी को देखते हुए एनसीएल सुरक्षा गार्डों से पाइपलाइन की पहरेदारी करवाएगा। यह गार्ड एनसीएल मुख्यालय और परियोजनाओं में आपूर्ति के लिए स्थापित 50 किमी पाइपलाइन पर 24 घंटे अपनी नजर बनाए रखेंगे। प्रबंधन ने यह निर्णय पानी की बढ़ती चोरी के मद्देनजर लिया है। निगरानी पर दो साल में 22 लाख खर्च किए जाएंगे। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
शक्तिनगर में एनसीएल मुख्यालय समेत दस कोयला प्रोजेक्टों को जलापूर्ति की एकीकृत व्यवस्था है। यहां से पाइप लाइन के जरिए पानी भेजा जाता है। करीब 50 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन में सैकड़ों लोग अवैध कनेक्शन लगाकर पानी चोरी कर रहे हैं।
जल संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि इससे पानी का दबाव कम हो जा रहा है और परियोजनाओं, उनके आवासीय परिसरों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। इसीलिए पहरेदारी का निर्णय लिया गया। दो साल की निगरानी में 22 लाख 17 हजार 390 रुपये खर्च किए जाएंगे। ठेका शर्तों के मुताबिक पहले अवैध कनेक्शनों की सूची बनेगी। ठेकेदार सुनिश्चित करेगा की कार्य शुरू होने के बाद एक भी अवैध कनेक्शन ना जुड़े। जुड़ता है तो प्रति कनेक्शन 30 हजार की कटौती होगी। पहले से जुड़े कनेक्शनों को काटने के लिए विभाग कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा। पहरेदारी शुरू होने से मध्य प्रदेश स्थित अमलोरी, निगाही, जयंत, उत्तर प्रदेश में आबाद दुद्धीचुआ, खडिय़ा, कृष्णशीला, बीना, ककरी परियोजना आदि को सुचारु आपूर्ति हो सकेगी।