अवधूत भगवान राम पीजी कालेज अनपरा और भाऊराव देवरस राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पर्यावरण विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का रविवार को समापन हो गया। भूजल के अत्यधिक दोहन और इसमें बढ़ते प्रदूषण को मानव जीवन के लिए खतरनाक बताया गया। कहा गया कि जल्द इसको लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाला समय संकट की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान अनपरा में पोस्टर प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही।
अनपरा में पर्यावरण संरक्षण, विकास एवं औद्योगिक विस्तार विषयक सेमिनार में दूसरे दिन के सत्र की अध्यक्षता बीएचयू के प्रोफेसर गोपाल सिंह ने की। परंपरागत फसलों की खेती पर जोर देते हुए कहा कि दो तिहाई बीमारियां औषधीय पौधों से दूर हो सकती हैं। बीएचयू के डा. एके सिंह, यूपी कालेज वाराणस के डा. एमपी सिंह, काशी विद्यापीठ भूगर्भ विभाग के डा. चंद्रशेखर, इंदिरा गांधी ट्रिब्यूनल यूनिवर्सिटी अमरकंटक के डा. एनके शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण के लिए नवीनतम तकनीक अपनाने पर बल दिया।देते हुए कहा कि पृथ्वी पर पीने योग्य जल की मात्रा महज 2.5 प्रतिशत है। इसलिए इसका अत्यधिक दोहन मानव जीवन के लिए संकट खड़ा कर देगा।
मगध विश्वविद्यालय बिहार के प्रो. एनके शास्त्री, यहां के पूर्व कुलपति प्रो. नंद, बीना परियोजना के पूर्व जीएम आरएन सिंह ने ज्यादा से ज्यादा पौधरोपण की नसीहत दी। कालेज के प्राध्यापक डा. नीलकंठ मिश्र के शोधपत्र और एमएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा अंशू सिंह के पोस्टर प्रस्तुति को सर्वश्रेष्ठ घोषित किया। प्राचार्य डा. पूनम सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उधर, दुद्धी में जैव विविधता एवं सतत विकास विषयक गोष्ठी में जल सरंक्षण पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि डा. लवकुश प्रजापति ने कहा कि कुओं और तालाबों के पानी प्रदूषित होने से बैक्टीरिया की मात्रा बढ़ रही है। विशिष्ट अतिथि डा. ध्रुव भूषण सिंह, डा. रमाकांत राय, डा. अनिल मिश्रा ने ग्रीन टेक्नालाजी को विकसित करने पर जोर दिया। डा. एसके श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।