अनपरा। क्षेत्र की परियोजनाओं की ओर से स्थापित पुनर्वास बस्तियों में आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। वर्षों बाद भी कई विस्थापितों को प्लाॅट नहीं मिला तो पानी, बिजली सहित अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराने में कोताही बरती जा रही है।
क्षेत्र में रिहंद बांध, एनसीएल और अनपरा तापीय परियोजनाओं की स्थापना से हजारों परिवार विस्थापित हुए। उनके पुनर्वास के लिए परियोजनाओं ने डिबुलगंज और रेहटा में बस्तियां बसाईं। यह आश्वासन दिया गया था कि उन्हें नौकरी के साथ प्लाॅट दिया जाएगा। परियोजना कर्मचारियों की तर्ज पर बिजली, पानी, सड़क, नियमित साफ-सफाई एवं कचरा उठान, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था, बच्चों की पढ़ाई के लिए विद्यालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। विडंबना है कि वर्षों बाद भी वहां कुछ भी नहीं हो पाया। पुनर्वास बस्तियों में पानी निकासी की समस्या बनी हुई है। कई गलियां और सड़कें अतिक्रमण की जद में हैं। दवा-उपचार की सुविधा नदारद है। परियोजना के अस्पताल में भी विस्थापितों को कोई वरीयता नहीं दी जाती। आवासीय परिसर में बने विद्यालयों में फीस भी बाहरी जितना ही ली जाती है। पुनर्वास बस्ती अब लावारिस स्थिति में पड़ी हुई है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि पुरखों की उपजाऊ भूमि को परियोजना द्वारा अधिग्रहण तो किया गया, लेकिन नियम के तहत न ही कोई सुविधा उपलब्ध कराई रही है और ना ही परियोजनाओं में संविदा नौकरी और ठेकेदारी के लिए वरीयता दी जा रही है। हम लोगों को दो-दाे बार विस्थापित किया गया है। काफी परिवारों को अभी तक प्लॉट तक नहीं दिया गया है।
परियोजना की स्थापना के समय पुनर्वास बस्तियां स्थापित की गई थीं। किन शर्ताें के आधार पर पुनर्वास बस्ती का निर्माण किया गया था, इसकी जानकारी नहीं है। फिर भी नियमानुसार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। -इं. जेपी कटियार, मुख्य महाप्रबंधक, अनपरा तापीय परियोजना।