चुनाव के ठीक बाद से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के मतदाता पेयजल संकट से जूूझेंगे, क्योंकि मार्च के बाद अप्रैल से गर्मी शुरू हो जाएगी। और हर साल गर्मी के दिनों में होने वाली इस समस्या से निजात के लिए ठोस और कारगर कदम न उठाने के नाते लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। कुछ क्षेत्रों में तो गर्मी की शुरूआत से ही पानी का संकट शुरू हो गया है। शिवाला गांव में बनी पानी की टंकी से करीब तीन माह से आपूर्ति ठप है। इस बार के चुनाव में पेयजल संकट भी मुद्दा बन गया है।
नगवां और चतरा ब्लॉक के अति नक्सल प्रभावित पहाड़ी इलाकों में गर्मी की शुरूआत से ही पानी का संकट खड़ा हो जाता है। चतरा ब्लॉक के शिवाला गांव में तो अभी से ही यह संकट शुरू हो गया है। यहां करीब एक साल पूर्व पानी की टंकी का निर्माण हुआ। इससे गांव के लोगों को पानी की आपूर्ति शुरू हुई। लेकिन करीब तीन माह से आपूर्ति बंद है। कुछ हैंडपंप भी धीरे-धीरे कम पानी देने लगे हैं। ऐसे में यह आशंका बढ़ गई है तपिश बढ़ने के साथ ही पानी का संकट गंभीर हो जाएगा। क्षेत्र के राजू त्रिपाठी, कैलाश, अखिलेश, विजय सिंह, अनिल, विनोद, सोमारू, राम सनेही, रमेश कुशवाहा, भरत, सुधीर, रविंद्र, रामसजीवन आदि का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में पानी का संकट खड़ा हो जाता है। पहाड़ी इलाकों के लेेेग दूषित पानी पीकर बीमार होते हैं। इसलिए इस बार शुद्घ पेयजल को चुनावी मुद्दा बनाया गया है। आठ मार्च को पानी की समस्या को ध्यान में रखते हुए मतदान किया जाएगा।