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खुलासा: भूमिहीनों के नाम से भी निकाल ली गई यूरिया

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शाहगंज स्थित एक बैंक के सामने भीड़ को सोशल डिस्टेंस कराते एसओ देवेंद्र प्रताप सिंह। - फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। कई साधन सहकारी समितियों पर उर्वरक की बंदरबाट की जा रही है। इसका खुलासा कृषि विभाग की जांच में हुआ है। साधन सहकारी समिति पापी से दो ऐसी महिलाओं को यूरिया वितरित करना दिखाया है जिनके नाम से जमीन ही नहीं है। इसी तरह से अन्य समितियों पर खाद के वितरण करने में गड़बड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। उधर, सच्चाई उजागार होने के बाद खाद की कालाबाजारी करने में संलिप्त कर्मियों में खलबली मच गई है।
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जिले में यूरिया समेत अन्य उर्वरक की किल्लत है। सुबह से शाम तक साधन सहकारी समितियों पर किसान लाइन में लगे रहते हैं। बावजूद इसके अधिकांश किसानों को नाममात्र की उर्वरक देकर काम चला दिया जाता है। कई समितियों के सचिव अपने चहेतों को जरूरत से अधिक उर्वरक देकर कालाबाजारी करवा रहे हैं। इसकी शिकायत शासन तक पहुंच गई है। पिछले दिनों शासन स्तर से जिला प्रशासन को जिले के ऐसे 20-30 किसानों की जांच करने का निर्देश दिया गया था, जिन्होंने सबसे अधिक खाद क्रय किया है।
डीएम के निर्देश पर एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह की देखरेख में जिला कृषि अधिकारी की टीम ने राबर्ट्सगंज, घोरावल और दुद्घी क्षेत्र के 29 किसानों की जांच की। जांच में कई समितियों पर उर्वरक के वितरण में गड़बड़ी होने की पुष्टि हुई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि 29 किसानों के नाम से 3700 बोरी यूरिया वितरित की गई है। बताया कि साधन सहकारी समिति पापी से करमा गांव की रहने वाली चंचला और गीता के नाम से 107 बोरी खाद क्रय किया जाना दिखाया गया है। जांच करने पर पता चला कि उक्त दोनों महिलाओं के नाम से जमीन ही नहीं है। जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी जा रही है। कहा कि दुकानदार पॉश मशीन में किसानों का अंगूठा लगवाकर उर्वरक दें। निर्धारित रेट से अधिक दर पर उर्वरक बेचने वालों के दुकान का लाइसेंस निरस्त कर आगे की कार्यवाही होगी।
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