सौभाग्य योजना के तहत रेवड़ी की तरह बांटे गए निशुल्क कनेक्शन अब बिजली निगम के गले की फांस बन गए हैं। निशुल्क कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता बिल देने से कतरा रहे हैं। 1.21 लाख उपभोक्ताओं ने कभी बिल जमा नहीं किए। इनपर कुल 328 करोड़ रुपये बकाया है। इनमें 82 हजार उपभोक्ता सौभाग्य योजना के हैं।
निगम के कर्मचारी उनसे बकाया वसूलने जाते हैं तो दो टूक कहकर लौटा दिया जाता है कि उन्हें मुफ्त बिजली मिली है तो फिर बिल क्यों दें। जिले में रॉबर्ट्सगंज और पिपरी डिविजन के अंतर्गत करीब तीन लाख उपभोक्ता हैं।
इसमें 1.21 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद कभी बिजली का बिल ही जमा नहीं किया। इन पर बिजली निगम का 328 करोड़ रुपये बकाया है। इसमें भी 82 हजार उपभोक्ता सिर्फ सौभाग्य योजना के लाभार्थी हैं।
झुग्गी, झोपड़ी और कच्चे मकान में रहने वाले इन उपभोक्ताओं को निशुल्क बिजली का कनेक्शन दिया गया था। योजना के तहत कनेक्शन कराने पर उन्हें कोई शुल्क नहीं देना था। इसमें आवेदन प्रक्रिया से लेकर घर तक तार खींचकर मीटर टांगने का खर्च शामिल था।
उपभोक्ताओं को यह नहीं बताया गया कि उन्हें मासिक बिल देना होगा। अब बिल का भुगतान उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। कनेक्शन के बाद एक बार भी बिल न देने वाले यह उपभोक्ता भारी भरकम बकाया देख सकते में हैं।
रोज कमाने-खाने वाले इन उपभोक्ताओं के पास बकाया चुकाने के लिए धनराशि की व्यवस्था करना संभव नहीं हो पा रहा। दूसरी ओर शासन से राजस्व वसूली के लिए लगातार बढ़ रहे दबाव के बाद बिजली निगम के अधिकारी-कर्मचारी बकायेदारों के पास जा रहे हैं तो उन्हें गुस्से का शिकार होना पड़ रहा है। पहले से खराब माली हालत वाले इन उपभोक्ताओं से वसूली निगम के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
जिले में 1.21 लाख उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कभी भी बिल जमा नहीं किया है। इन उपभोक्ताओं पर 328 करोड़ रुपये बिजली बिल बकाया है। बकायेदारों में सौभाग्य योजना के भी 82 हजार लाभार्थी हैं। शासन के निर्देशों के तहत बकाया वसूली का प्रयास किया जा रहा है।
-संजीव वैश्य, अधीक्षण अभियंता, बिजली निगम सोनभद्र।