सोनभद्र। केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बुधवार को आई टीम ने अलग-अलग पावर व कोल प्लांटों में जाकर पूर्व में एनजीटी की तरफ से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की गई व्यवस्था का जायजा लिया। टीम में शामिल अधिकारियों ने रिहंद डैम में सिल्ट भराव और ऊर्जांचल क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
प्रदूषण के लिहाज से सोनभद्र और इससे सटे सिंगरौली की स्थिति काफी संवेदनशील है। हवा में प्रदूषण की स्थिति हानिकारक स्थिति तक पहुंच गई है। उधर, अनपरा-शक्तिनगर मार्ग पर 18 किमी तक प्रति किमी 100 किग्रा से भी अधिक अति सूक्ष्म धूल कण की रिपोर्ट सामने आने के बाद अधिकारियों में खलबली मची हुई है। इसको लेकर पिछले सप्ताह प्रमुख सचिव पर्यावरण ने भी चिंता जताई थी। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम को सख्ती बरतने तथा वस्तुस्थिति से अवगत कराने का निर्देश दिया था। इस मसले को लेकर बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी की तरफ से पिछले दिनों में परियोजनाओं से निकलने वाले वाहनों के पहियों की धुलाई के लिए व्हील वाशिंग सिस्टम लगाने के लिए पत्र जारी किया गया था। प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में परियोजनाओं में किए गए उपायों की जानकारी भी 14 नवंबर को देनी है। बताया जाता है कि चार सदस्यीय टीम इसी सिलसिले में परियोजनाओं में प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की जानकारी लेेने परियोजनाओं में पहुंची। इसकी पुुष्टि बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने भी की। टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक डा.आरडी पाटिल के अलावा एक अन्य अधिकारी शामिल हैं। टीम में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम व एक अन्य अधिकारी को भी शामिल किया गया है। प्रशासन की तरफ से एसडीएम दुद्धी रमेश कुमार भी टीम के साथ मौजूद रहे। टीम ने ज्यादा प्रदूषण वाले क्षेत्र की स्थिति देखी। रिहंद डैम का जायजा लिया। अनपरा-शक्तिनगर मार्ग पर धूल की स्थिति जानी। कोल और बिजली परियोजनाओं से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट के निस्तारण की जानकारी ली।