इस बार यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में भले ही ज्यादातर विद्यालयों का परिणाम शत-प्रतिशत रहा लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का रिजल्ट दो फीसदी कम रहा। यह गिरावट हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में है।
शिक्षा को लेकर तेजी जागरूकता आई है। अभिभावक से लेकर छात्र तक पढ़ाई को लेकर गंभीर हैं लेकिन यह भी सच सामने आ रहा है कि ज्यादातर बच्चे सिर्फ उत्तीर्ण होने तक पर ही निर्भर हैं।
पिछले वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा का परिणाम 78.33 प्रतिशत था जो कि इस बार घटकर 76.31 हो गया। पिछले वर्ष इंटरमीडिएट की परीक्षा का परिणाम 91.80 प्रतिशत था जबकि इस वर्ष परिणाम दो प्रतिशत नीचे खिसक कर 89.23 रह गया है।