न्यायालय में सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बताया कि उस समय वह कक्षा आठ में पढ़ रही थी। उसके सहेली की तबियत खराब हो गई थी जिसे छोड़ने वह उसके घर गई। वापस स्कूल आते समय दोनों उसका मुंह कपड़े से बांधकर जबदस्ती बाइक पर बैठाकर ले गए। घर ले जाकर बारी-बारी से बलात्कार किया। रात में किसी तरह वह वहां से भाग घर पहुंची। कक्षा आठ के बाद उसने पढ़ाई छोड़ दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने न्यायालय में जो शैक्षिक रिकार्ड प्रस्तुत किया उससे पीड़िता की उम्र घटना के समय 14 वर्ष चार माह होने की पुष्टि हुई। न्यायालय ने पाया कि पीड़िता का अपहरण करते हुए बाइक पर बीच में बैठाकर ले जाने से अपराध का सामान्य आशय स्पष्ट है। 16 वर्ष से कम आयु की किसी महिला के साथ सामान्य आशय से समूह गठित करके एक या अधिक व्यक्ति बलात्संग (दुष्कर्म) करते हैं तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को दुष्कर्म का अपराधी माना जाएगा।
बचाव पक्ष ने दी कई दलीलें, पर नहीं मिल पाई कोई राहत
बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन्होंने अपहरण, दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी का कोई अपराध नहीं किया है। एफआईआर विलंब से दर्ज कराई गई है। तथ्य से जुड़े केवल दो साक्षी परीक्षित कराए गए हैं। उन्हें पुरानी रंजिश के कारण फंसाया गया है। सजा के मसले पर सुनवाई के समय भी बचाव पक्ष ने भविष्य में अच्छे नागरिक की तरह जीवन गुजारने की बात कहते हुए कम से कम दंड से दंडित जाने की गुजारिश की लेकिन न्यायालय ने उनकी सभी दलीलों को खारिज कर दिया। कहा कि दोषियों को कठोरतम दंड देकर समाज में संदेश दिया जाना जरूरी है ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह का अपराध करने से बचे।
जानिए किस अपराध के लिए कितनी सुनाई गई सजा
पॉक्सो एक्ट के लिए कठिन आजीवन कारावास, धारा 342 आईपीसी के अपराध के लिए छह माह, धारा 363 आईपीसी के अपराध के लिए चार वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। प्रत्येक को 55-55 हजार कुल एक लाख 10 हजार अर्थदंड लगाया गया। न्यायालय ने कहा कि आजीवन कारावास का अभिप्राय अभियुक्त के शेष पूरे जीवनकाल के लिए कारावास होगा। अर्थदंड जमा होने के बाद प्रतिकर के रूप में 85 हजार पीड़िता को दिए जाएंगे। न्यायालय ने माना कि निर्धारित किया गया प्रतिकर पीड़िता के पुनर्वास के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से पीड़िता को पुनर्वासित करने के लिए प्रतिकर की सिफारिश की जाती है।